Tuesday, 28 November 2023

शुक्र का तुला राशि में परिवर्तन, इन राशि वालों की सुख-सुविधा में होगी वृद्धि


जीव-जगत की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महान ग्रह शुक्र 30 नवंबर की मध्य रात्रि 01 बजकर 04 मिनट पर कन्या राशि की यात्रा समाप्त करके तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इसी के साथ इनका नीचराशिगत गोचर प्रभाव भी समाप्त हो जाएगा। इस राशि पर ये 25 दिसंबर की सुबह 06 बजकर 45 मिनट तक गोचर करेंगे उसके बाद वृश्चिक राशि में प्रवेश कर जाएंगे। स्वयं की राशि तुला में इनके प्रवेश का अन्य राशियों पर कैसा प्रभाव रहेगा ? इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।

By - Astro Saurabh Garg Ji

मेष राशि
राशि से सप्तम दांपत्य भाव में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव हर तरह से बेहतरीन सफलता दिलाने वाला सिद्ध होगा। वैवाहिक वार्ता सफल रहेगी। दांपत्य जीवन में भी मधुरता आएगी। शासन सत्ता का पूर्ण सहयोग मिलेगा। चुनावसे संबंधित कोई निर्णय लेना चाह रहे हों तो उस दृष्टि से भी ग्रह स्थितियां अनुकूल रहेंगी। सरकारी विभागों में किसी भी तरह के टेंडर आदि के लिए आवेदन करना चाह रहे हों तो भी समय अनुकूल रहेगा। ससुराल पक्ष से भी सहयोग के योग।

वृषभ राशि
राशि से छठे शत्रु भाव में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव अप्रत्याशित परिणाम वाला सिद्ध होगा। स्वास्थ्य के प्रति चिंतनशील रहना होगा। गुप्त शत्रुओं से भी बचना होगा। झगड़े विवाद तथा कोर्ट-कचहरी से संबंधित मामले भी बाहर ही सुलझाएं। यात्रा देशाटन का लाभ मिलेगा। किसी दूसरे देश के लिए वीजा आदि का आवेदन करना चाह रहे हों तो उस दृष्टि से भी ग्रह स्थितियां अनुकूल रहेंगी। विलासिता पूर्ण वस्तुओं पर अधिक खर्च होगा। वाहन सुख प्राप्ति के योग बन रहे हैं।


मिथुन राशि
राशि से पंचम विद्या भाव में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव किसी वरदान से कम नहीं है। विद्यार्थियों और प्रतियोगिता में बैठने वाले छात्रों के लिए तो यह समय और भी अनुकूल रहेगा। जैसी सफलता चाहेंगे हासिल करेंगे। रोजगार की दिशा में किए गए प्रयास भी सफल रहेंगे। प्रेमसंबंधी मामलों में प्रगाढ़ता आएगी। विवाह भी करना चाह रहे हों तो उस दृष्टि से अवसर अनुकूल रहेगा। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। नवदंपति के लिए संतान प्राप्ति और प्रादुर्भाव के भी योग।


कर्क राशि
राशि से चतुर्थ सुखभाव में गोचर करते हुए शुक्र कई तरह के सुखद परिणामों से पारिवारिक माहौल खुशनुमा बना देंगे। मित्रों तथा संबंधियों से सुखद समाचार प्राप्ति के योग। मकान अथवा वाहन का क्रय करना चाह रहे हों तो उस दृष्टि से भी ग्रह गोचर अनुकूल रहेगा। शासन सत्ता का भी सहयोग मिलेगा। सामाजिक पद प्रतिष्ठा बढ़ेगी। लिए गए निर्णय और किए गए कार्यों की सराहना होगी। केंद्र अथवा राज्य सरकार के विभागों में प्रतीक्षित कार्य संपन्न होंगे।



सिंह राशि
राशि से तृतीय पराक्रम भाव में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव आपके स्वभाव में सौम्यता लाएगा। परिवार का माहौल खुशनुमा रहेगा। छोटे भाइयों से मतभेद बढ़ने न दें। धर्म तथा आध्यात्म के प्रति रुचि बढ़ेगी। धार्मिक ट्रस्टों तथा अनाथालय आदि में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे और दान-पुण्य करेंगे। विद्यार्थी वर्ग विदेश में पढ़ाई करने के लिए जाने का प्रयास कर रहे हों तो भी ग्रह गोचर और अनुकूल रहेगा। योजनाएं गोपनीय रखें और आगे बढ़ें।




कन्या राशि
राशि से द्वितीय धन भाव में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव आर्थिक पक्ष मजबूत करेगा। काफी दिनों का दिया गया धन भी वापस मिलने की उम्मीद है। इस अवधि के मध्य मकान अथवा किसी भी तरह की महंगी वस्तुओं का क्रय करने की सोच रहे हों तो अवसर अच्छा है लाभ उठाएं। कार्यक्षेत्र में षड्यंत्र का शिकार होने से बचें बेहतर रहेगा। कार्य संपन्न करें और सीधे घर आएं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी सावधान रहना होगा। विवादित मामले से दूर ही रहें।




तुला राशि
अपनी स्वयं की राशि में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव अप्रत्याशित परिणाम देगा। रोजगार की दिशा में किए गए सभी प्रयास सफल रहेंगे। पद और गरिमा की वृद्धि होगी। नौकरी में भी स्थान परिवर्तन के लिए प्रयास करना चाह रहे हों तो यह अवसर बेहतरीन रहेगा। शासनसत्ता का पूर्ण सहयोग मिलेगा। शादी विवाह से संबंधित वार्ता सफल रहेगी। दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी। संतान सुख में भी वृद्धि होगी। नवदंपति के लिए संतान प्राप्ति के भी योग हैं।



वृश्चिक राशि
राशि से बारहवें व्यय में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव आर्थिक पक्ष मजबूत करेगा किंतु अत्यधिक भागदौड़ के कारण व्यय भी खूब होगा। विलासितापूर्ण वस्तुओं पर भी अधिक खर्च करेंगे। विदेशी मित्रों तथा संबंधियों से सुखद समाचार प्राप्ति के योग। कार्य-व्यापार के लिए विदेश जाने की सोच रहे हों तो यह अवसर बेहतरीन रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी समस्या से सावधान रहें। झगड़े विवाद तथा कोर्ट कचहरी के मामले आपस में सुलझा लेना समझदारी रहेगी।



धनु राशि
राशि से एकादश लाभ भाव में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव संतान संबंधी चिंता में कमी लाएगा। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों और बड़े भाइयों से भी सहयोग मिलेगा। आय के साधन बढ़ेंगे। काफी दिनों का दिया गया धन भी वापस मिलने की उम्मीद। इस अवधि के मध्य किसी को भी अधिक धन उधार के रूप में न दें। अन्यथा वह धन समय पर नहीं मिलेगा। प्रेम संबंधी मामलों में प्रगाढ़ता आएगी। विवाह भी करना चाह रहे हो तो भी अवसर बेहतर है। 




मकर राशि
राशि से दशम कर्म भाव में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव कार्य व्यापार में उन्नति तो देगा ही लिए गए निर्णय और किए गए कार्यों की सराहना भी होगी। माता-पिता के स्वास्थ्य के प्रति चिंतनशील रहें। जमीन जायदाद संबंधी मामले हल होंगे। केंद्र अथवा राज्य सरकार के विभागों में किसी भी तरह के टेंडर आदि के लिए आवेदन करना चाह रहे हों तो समय बेहतर रहेगा। मित्रों तथा संबंधियों से सुखद समाचार प्राप्ति के योग। यात्रा के समय सामान चोरी होने से बचाएं।


कुंभ राशि
राशि से नवम भाग्य भाव में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव कमोवेश अच्छा ही रहेगा। किसी दूसरे देश के लिए वीजा आदि का आवेदन करना चाह रहे हों तो उस दृष्टि से भी ग्रह-गोचर अनुकूल रहेगा। आध्यात्मिक उन्नति तो होगी ही धर्म कर्म के मामलों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे और दान पुण्य करेंगे। जो लोग नीचा दिखाने की कोशिश में लगे थे वहीं मदद के लिए आगे आएंगे। कार्यक्षेत्र में षड्यंत्रकारी परास्त होंगे। न्यायिक मामलों में निर्णय आपके पक्ष में आने के संकेत हैं।



मीन राशि
राशि से अष्टम आयु भाव में गोचर करते हुए शुक्र का प्रभाव प्रतीक्षित योजनाओं को सफल बनाने में कामयाब करेगा। जायदाद संबंधी मामलों को तो हल करेगा ही नए मकान अथवा वाहन का क्रय करना चाह रहे हों तो उस दृष्टि से भी यह प्रभाव अनुकूल रहेगा। सामाजिक पद प्रतिष्ठा बढ़ेगी। किए गए कार्यों की सराहना होगी। इस अवधि के मध्य षड्यंत्र का शिकार होने से बचें। परिवार में अलगाववाद की स्थिति उत्पन्न न होने दें। पैतृक संपत्ति संबंधी विवाद हल होंगे। 


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Monday, 20 November 2023

5 साल बाद त्रिग्रही योग बनने से इन 3 राशि वालों की चमकेगी किस्मत, सूर्य और मंगल देव की रहेगी असीम कृपा


Tirgrahi Yog In Scorpio: वैदिक ज्योतिष मुताबिक ग्रह एक निश्चित अवधि पर राशि परिवर्तन करके त्रिग्रही योग और राजयोग बनाते हैं। जिसका असर सभी राशियों के लोगों पर पड़ता है। आपको बता दें कि ग्रहों के सेनापति मंगल और ग्रहों के राजा सूर्य देव और व्यापार के दाता वृश्चिक राशि में संचरण कर रहे हैं। जिससे वृश्चिक राशि में पॉवरफुल त्रिग्रही योग का निर्माण होने जा रहा है। वहीं इस योग का प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर देखने को मिलेगा। लेकिन 3 राशियां ऐसी हैं, जिनको इस समय आकस्मिक धनलाभ और तरक्की के प्रबल योग बन रहे हैं। आइए जानते हैं ये लकी राशियां कौन सी हैं…

मकर राशि (Makar Zodiac)

आप लोगों के लिए त्रिग्रही योग का बनना शुभ फलदायी साबित हो सकता है। क्योंकि यह योग आपकी राशि से इनकम और लाभ स्थान पर बन रहा है। इसलिए इस समय आपकी आय में जबरदस्त इजाफा हो सकता है। सब आपको कुछ मेहनत करनी की जरूरत है। साथ ही इस अवधि में आय के नए स्त्रोत से धन कमाने के मौके आपको मिलेंगे। वहीं सूर्य देव की कृपा से आपके अंदर इस समय गजब का आत्मविश्वास देखने को मिलेगा। वहीं आपके धन सम्‍मान में वृद्धि होगी और रुकी योजनाएं फिर से आरंभ हो सकती हैं। निवेश से लाभ होगा। 


कुंभ राशि (Kumbh Zodiac)

त्रिग्रही योग का बनना कुंभ राशि के लोगों को अनुकूल सिद्ध हो सकता है। क्योंकि यह योग आपकी गोचर कुंडली के कर्म भाव पर बन रहा है। इसलिए आपको नौकरी और कारोबार के मामले में इस वक्‍त अप्रत्‍याशित लाभ होने की उम्‍मीद है। वहीं इस समय आप वाहन और प्रापर्टी खरीद सकते हैं। साथ ही जो लोग बेरोजगार हैं, उनको नौकरी मिल सकती है। वहीं नौकरीपेशा लोगों का ऑफिस में सीनियर्स के साथ आपका बेहतर तालमेल बैठेगा और आपको अनुकूल परिणाम प्राप्‍त होंगे। साथ ही पिता के साथ आपके संबंध अच्छे रहेंगे। 


सिंह राशि (Leo Zodiac)

आप लोगों के लिए त्रिग्रही योग का बनना लाभकारी सिद्ध हो सकता है। क्योंकि यह योग आपकी राशि से चतुर्थ भाव में बनने जा रहा है। इसलिए इस समय आपको वाहन और प्रापर्टी का सुख प्राप्त हो सकता है। साथ ही इस समय आपकी भौतिक उन्नति हो सकती है। वहीं आपको करियर से जुड़े बेहतरीन मौके मिल सकते हैं। साथ ही भूमि से संबंधित कोई डील करने में आपको अच्‍छा लाभ होने की उम्‍मीद है। वहीं अगर आप रियल स्टेट, जमीन- जायदाद से जुड़ा कार्य करते हैं, तो आपको अच्छा मुनाफा हो सकता है। वहींं इस समय आपके माता के साथ संबंध मधुर रहेंगे। 




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Sunday, 19 November 2023

Face Reading/मुख ज्योतिष

Face Reading (मुख ज्योतिष): Physiognomy and Facial Expression includes all the Features of Each Particular Human Face.

Although the study of physiognomy is not part of a separate science of biology or psychology, people have been and are preoccupied to distinguish and interpret people’s faces, facial expressions and micro expressions(Face Reading). The best way to learn face reading is to first learn how to recognize the different facial features and then learn how to relate them to their corresponding personality traits.


Face Reading Analyzing your personal traits such as:

  • – Your forehead type and size, occurring wrinkles and their alignment
  • – Eyebrows and eyes colour, size, distance between them and shape
  • – Nose shape and length
  • – Mouth, lips and chin, shape and size
  • – Ears, hair and face shape

Surprisingly, many people may not know the answer to many of these questions, that’s why it’s very important to learn how to recognize these facial features in order to master the science of face reading (Face Reading). People usually become very enthusiastic about learning face reading and thus skip this step; however, it’s a strongly recommended step if you want to become a good face reader.

Face Reading Facial Shape & Face Shape (मुख ज्योतिष) :

Face Reading Round Face:

They are known as water-shaped faced people. They have plump and fleshy face. They are known to be sensitive and caring. They are thought to have strong sexual fantasies. If you are looking forward for a long-term, stable relationship, these people will prove to be the right choice.

Face Reading Oblong Face:

The long, thin face is called the wood-shape face. These people may have a muscular or athletic physique. They are thought to be practical, methodical and tend to be a tad more overworked. They are weighed along with narcissism and may have problematic relationships.

Face Reading Triangular Face (मुख ज्योतिष):

These face types are usually related to a thin body and intellectual persuasion. They are considered to be creative and thought to have a fiery temperament according to the Chinese face readers.

Face Reading Square (मुख ज्योतिष):

They are known as the metal shape face. These people are thought to have an intelligent, analytical and decisive mind. The face shape is associated with an aggressive and dominating nature.

Rectangular Face:

signals some variety: they tend to dominate but with less force, often they get their way in politics, business, sports, being always balanced, sometimes ambitious, sometimes melancholic.

Face Reading Oval:

Expresses a character somewhat balanced, sweet, charming even, in which case those individuals are often best diplomats, but also able to duplicate, women are often best artists. Sometimes they can be dangerous, but temperamentally are weak; often they are weaker in physical strength, sometimes underactive.

Ears of Face Reading:

Small ears show honour, manners and affection. As earlobe is thicker, the force of lived feelings is increased. Ears too small show shyness and reserve, and if the ears are long and narrow, these qualities increase. Medium ears show energy and determination.

Big ears with thick earlobe show rudeness and materialism. Distanced ears are showing cruelty destruction desire. Vertical ears show strength, courage, energy, power(Face Reading).

Normal ears are those that do not pass the height above or below the eyebrows and nose. Those whose ears get over the eyebrows appear to have an angry character, vindictive and even have criminal tendencies(Face Reading).

Ears with detached earlobes from the head show generosity and free spirit. Contrarian to these qualities is shown by earlobes closed to the head. A large distance between the eyes and ears show intellectual capacity and talent (Face Reading).

Forehead of Face Reading (मुख ज्योतिष):

  • A high brow reveals aptitude for study. These people are very diligent and trained. They reach success.
  • A low and wide forehead shows an intuitive nature, endowed with natural skill and imagination. These people have a lot of spontaneity and often by their spirit will shine. They are more interested on impressions than the knowledge gained through study.
  • A little wide and high forehead well shaped eyebrows is the most desirable. It denotes prospect of permanent success.
  • A square forehead shows honesty, sincerity. Straight eyebrows increase these qualities. Loosing forehead shows lack of intelligence.
  • Forehead with deep lines (wrinkles) it reveals those who indulge in contemplation and research. Head without lines signifies cold, selfishness, lack of empathy and sarcasm. Vertical lines (wrinkles) between the eyes reveal the power of concentration.

Eyebrows of Face Reading (मुख ज्योतिष):

Eyebrow qualities reveal thinking styles including power, focus, follow-through, ideas, insomnia, people-orientation and patience.

Thickness of Eyebrows – Thought Quantity:

Thick eyebrow people have many ideas and are powerful thinkers. Thin eyebrows show fewer ideas with more focus. Thick at the beginning shows a great starter while thick at the end reveals a great finisher.

  • Thick Eyebrow: many ideas
  • Thin Eyebrow: fewer ideas
  • Thick at Beginning: great starter
  • Thick at End: great finisher
  • Eyebrow Hairs – Idea Quality

Hairs are the individual ideas of the thinking process. Here we can read conflict, scattered thinking, early maturity and insomnia.

  • Contradictory: given to conflict
  • Scattered: disconnected thinking
  • Root hairs: early bloomer
  • Across Nose Bridge: constant thinking, insomnia
  • Eyebrow shape – orientation

The curve or angle of the eyebrow lets you read the organization of thoughts. Specifically this reveals orientation toward people or ideas or conflict.

  • Curved: people
  • Straight: ideas
  • Angular: conflict

Eyebrow Height- Patience

  • High-brows are patient while low-brows are impulsive.
  • High brows: patient
  • Low brows: impulsive

Eyes of Face Reading:

Brown Eyes– Brown eyes are all about the Earth qualities of a person, including energy, fertility, endurance, creativity, lots of courage, and of course, grounding. And they are not much interested in material gains. They love nature, are spiritual and are very strong and even thick headed at times, very independent(Face Reading).

Black Eyes– This signifies mystery, sex, witchcraft, secrets, darkness (vampires anyone?). If you’ve read any romances and especially paranormal romances, you’ll notice that all the heroes (and romantic vampires) have black eyes. They are all mysterious and all the attributes listed above can be easily given to each and one of them. They never tell much about themselves and they also are known to have psychic powers(Face Reading).

Hazel Eyes– They are again independent and courageous. They are extremely sensible and they are said to be empathise.

Blue Eyes– Blue speaks about clairvoyant abilities (didn’t we just say the black eyes are the psychic ones?), and can see the future and the past like Nostradamus or Edgar Cayce. They are also very observant of their surroundings. Blue speaks of the energy of the sky and water (BIG surprise there!)

Green Eyes– Would you be surprised if I told you that green eyes are all about the nature, healthy living, and freshness? These people of all types are compassionate and they are spiritual in nature. They are our healers(Face Reading).

Gray Eyes– These folks are also sensitive and have an inner strength that not many others possess. They have a deep wisdom and can change their mood to suit the current occasion.

Eye that change colours and shades, show imagination and levity in feelings, but honesty in business. Character of these people is lively and courageous.

The colored circular portion of the eye is called ‘iris’. If these iris is float too high, we will have an unstable and disturbed person. He is not trust worthy. Sometimes it denotes premature death.

  • If the iris is sinking too low in the eye, a cruel and perverse nature is indicated.
  • If the iris is large, thus occupying much of the space in the eye , the person cannot hide affections and emotions.
  • If the iris is small, and hence the white portion of the eye is much seen, then the person is secretive.
  • If the gap between the two eyes is large, the person is expansive and communicative.
  • If the eyes are closely set, then the person will be criticising others, and will not demonstrate his feelings.

Colour of Eyes of Face Reading (मुख ज्योतिष):

A dark eye denotes a forceful nature than a light colored one. Light blue colored eyes represent flirtation. Deep blue is a sign of gentle love. Brown eyed people are devoted in love and friendship. Hazel eyes represent a highly impressionable and affectionate type. Grey represents good intellect and imagination. Green eyes denote an inventive and adaptable nature. Black eyes provide passion and tenderness.

Nose of Face Reading (मुख ज्योतिष):

A perfect nose is one whose length is equal to the width of the forehead, and at the end has a width equal to the length of the eye.

Aquiline nose reveals a commanding power, determination and pride. If the nose is narrow it loses these qualities and replaces them with a tyrannical character.

Straight well-formed nose shows patience, kindness, balance, elegance and power to endure, fascination but also cold and indifference, liberal ideas in relation to moral and social conventions.

Aquiline nose with the tip bent down, showing a melancholy nature, yet proud and bold. These people will never be funny, but will have a regular sarcasm.

Straight nose with the tip bent down, shows a more melancholic nature, but less envious and more lenient than those with curved nose.

Nose pointing up high and slightly curved in, show enthusiasm, skill. These people reach their goals through their cheerful and stylish manner. You cannot be mad on them for too long. They laugh in defence and they’ll implement their plan despite any obstacles.

Snub nose show a tendency to dominance, lack of elegance and behaviour in life, but it can be accompanied by a literary and poetic power.

If the nose is long, the person will be proud of his accomplishments. If short nose is found, we will have a free person escaping from responsibility. Broad nose gives stability of mind.

Nose tilted up with nostrils visible represents a spendthrift and emotional person.

Lips of Face Reading (मुख ज्योतिष):

Upper Lip- Expression of Thought

A thick upper lip is outspoken and direct while a thin upper lip is indirect and secretive.

  • Thick Upper Lip: outspoken
  • Thin Upper Lip: secretive
  • Lower Lip – expression of emotion

Charmers can persuade people with their Blarney lip while reserved people speak with a thin lower lip.

  • Thick Lower Lip: persuasive
  • Thin Lower Lip: reserved

The size of the upper lip represents the ability to love and the size of lower lip represents need for love.

If the lip corners are turned up, cheerful and friendly disposition is seen.

If the lip corners are turned down, irresolute person with depression can be seen.

Full and broad lips show sensuous tendency. Thin lips show brevity and concise behaviour of the person. He will also be a learned person.

  • Chin
  • Chin size – willpower

A large chin is found on a person who is demanding and aggressive while a small chin person is passive and compliant.

  • Large chin: aggression
  • Small chin: compliance
  • Chin width – survival

A broad chin can take adversity because it is physically and emotionally tough while a narrow chin is weaker and more tender-hearted.

  • Wide chin: tough
  • Narrow chin: tender
  • Chin shape – battles

The curve or shape of the chin reveals the battlefield that is preferred by this person. A curved or rounded chin is a person who fights in the arena of people, a straight or square chin deals with ideas, while an angular chin likes conflict and control.

  • Curved chin: people
  • Straight chin: ideas
  • Angular chin: control

A narrow, pointed or weak chin represents less energy and drive. They face problems in old age. A broad, round chin is symbolic of generosity and good humour. A broad and square shaped chin makes the person work hard. It is a mark of steadiness.

Mouth of Face Reading:

A large mouth is a sign of outgoing and extroverted person. A small mouth represents introverted, careful and cautious people.

Expressions of fun, thoughts, emotions and decisions are broadcast to the world by the shape and size of the features of the mouth.

  • Mouth size – fun

A large mouth is more fun, social and talkative while a small mouth is quiet, private and sincere.

  • Large mouth: social
  • Small mouth: sincere

Jaw of Face Reading:

A strong and deep jaw line just below the ear lobe represents the person has good will power and energy. Weak jaw indicates flexibility.

A simple chin face reading can give you very valuable information in only few seconds. Here’s what the chin will tell you!

Prominent jaws: active, very impatient, like to take the first step and be in charge in a relationship as well at work, opinionated, judgmental, strong, often stand up and fight for what they believe in, many politicians have prominent jaws(Face Reading).

Small jaws: enjoy pleasures in life, sophisticated, demanding, and intolerant, go for quality over quantity, and seek authentic, intimate & harmonious relationships, conventional, like traditions.

When the soul creates its body in the mother’s womb, and slowly limb by limb is formed, the interactions of previous birth’s instincts with the soul lead to alterations in the outer body. So by observing the outer body, we can estimate the inner self of the person. This is the root idea of Physiognomy

The Face as a Whole of Face Reading:

By observing the face of a person as a whole, we can get a keen idea of how his life would be in general, starting from childhood till his old age.

Forehead– A forehead reading can give you insights about the condition of a person’s heart, bladder, and small intestines. A forehead without any spots, lines, rash, or colour change, indicates a good physical health. If there are any skin problems on the forehead, then there may be problems with the heart, bladder, or small intestines– (internal organs or energy meridians).

Temples, Area Between the Eyes – Problems with the liver can show up as pimples, lines, or colour changes around the eyes.

Area below the Eyes– Eye bags, or dark circles under the eyes is indications of issues with the kidneys or the kidney meridian, according to Chinese face reading.

Upper Cheek, Upper Lip – Any problems with the stomach will be noticed on the upper cheek or upper lip, as colour change, rash, spots, or lines.

Nose, Ears – Red nose or ears, or spots on these areas, can be signs of heart problems, according to Chinese face reading.

Lower Cheeks, Chest – The lung is related to the lower cheeks and chest, which means that any problems with the lung could show up as skin problems on these areas.

Lower Lip, Crease at base of Nostrils, Sides of Chin, and Back – Skin problems in any of these areas could be a sign of problems with the large intestines, according to Chinese face reading(Face Reading).

Chin, Jaw Line – Chinese face readers have noticed that spots, lines, or colour changes on the chin are indications of hormonal imbalance, or problems with the reproductive system.

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Wednesday, 8 November 2023

सूर्य मंत्र का अर्थ, महत्व और जानें लाभ

सूर्य मंत्र का अर्थ, महत्व और जानें लाभ

योग में मन और आत्मा को एकाग्र करने के लिए मंत्रों का उपयोग किया जाता है। यह प्रणायाम और ध्यान केंद्रित करने में भी मदद करता है। हिंदू धर्म में सूर्य देवता की पूजा करने के लिए सूर्य मंत्र का उच्चारण किया जाता है।

सूर्य सबसे शक्तिशाली ग्रहों में से एक है, क्योंकि यह मौसम पर राज करता है। यह मानवजाति की भोजन आपूर्ति के लिए फसल की पैदावार करता है। इसके अलावा और भी कई कारणों से सूर्य देव की पूजा की जाती। यह मान्यता है कि सूर्य देव प्रकाश और ऊर्जा के प्रदाता हैं। यह भी प्रचलित है कि सूर्य देव एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें मनुष्य अपनी नग्न आंखों से देख सकता है- प्रत्यक्ष दैवम।

जो लोग नियमित रूप से सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हैं, सूर्य देव उनके जीवन से अंधकार को दूर करते हैं। सूर्य देव के तेज प्रभावों के कारण ही देश के विभिन्न हिस्सों में उन्हें अर्का और मित्रा के नाम से जाना जाता है।

सूर्य मंत्र

सूर्य मंत्र: वे कैसे मदद करते हैं?

सूर्य मंत्र (surya mantra) वाक्यांशों की एक श्रृंखला है। सूर्य देव का आशीर्वाद और शक्ति पाने के लिए लोग इस मंत्र का उच्चारण करते हैं। सूर्य देव अपने भक्तों के अशांत मन को शांत करते हैं और उनकी जिंदगी में सकारात्मकता लाते हैं। ज्योतिष में कई सूर्य मंत्र हैं। प्रत्येक मंत्र का अपना अर्थ और प्रभाव है। हालांकि, सभी मंत्र मूलरूप से मन की शांति और जीवन में समृद्धि को बढ़ावा देते हैं।

इसके अलावा नियमित सूर्य मंत्रों का उच्चारण करने से बेहतर स्वास्थ्य लाभ होता है और इससे भक्ति के प्रति उनकी आस्था बढ़ती है। यह जातक को ब्रह्मांड के प्रति आभार व्यक्त करने और उन्हें स्वास्थ्य तथा शांति का भंडार बनने में मदद करता है। इसका अर्थ यह है कि सूर्य देव एकमात्र ऐसे भगवान हैं, जो रोगों को दूर करते हैं और पूरी दुनिया को पुनर्जीवित करेंगे। इसी वजह से प्रत्येक व्यक्ति को धन, स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए सूर्य देवता का ध्यान करना चाहिए।

सूर्य मंत्र का जाप कैसे करें

जातक सूर्योदय के तुरंत बाद सूर्य मंत्र (surya mantra) का जाप कर सकते हैं। लेकिन आपका उच्चारण स्प्ष्ट होना चाहिए और मन में किसी भी तरह की नकारात्मक भावना नहीं होनी चाहिए। सूर्य मंत्र का उच्चारण करने वाले लोगों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वे सकारात्मकता को अवशोषित करते हैं इसलिए ध्यान करते समय खुद को शांत रखना चाहिए।

इसके अलावा, आपको सूर्य मंत्र का जाप करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • भगवान सूर्य रविवार के शासक हैं इसलिए रविवार के दिन किसी भी सूर्य मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। यदि आप इस मंत्र का प्रतिदिन जाप करते हैं, तो इसकी शुरुआत रविवार से करें।
  • प्रार्थना और ध्यान की शुरुआत सूर्य स्नान के तुरंत बाद शांत दिमाग से करनी चाहिए। इस मंत्र का जाप पूर्व दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए।
  • ताजे फूल और धूप के उपयोग से बेहतर तरीके से ध्यान लगाने में मदद मिलती है। इसलिए जब भी आप पूजा-प्रार्थना करें, इनका उपयोग अवश्य करें।
  • सूर्य मंत्र (surya mantra) का जाप करते समय पानी का बर्तन और कुमकुम रखना भी बेहतर माना जाता है।
  • सूर्य मंत्र का जाप करते समय यह सुनिश्चित करें कि आपके दिमाग में बुरे विचार या नकारात्मक भाव जरा भी ना हों।
  • साथ ही सूर्य मंत्र का जाप करते समय अपने मन या हृदय में किसी भी प्रकार का ईर्ष्या या क्रोध नहीं रखनी चाहिए। यह सकारात्मक ऊर्जा को बाधित करेगा और शुभता के आगमन में रुकावट पैदा करेगा।

महत्वपूर्ण सूर्य मंत्र

1. सूर्य मंत्र (surya mantra)

वैदिक ज्योतिष में सूर्य मंत्र, सूर्य देव को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ मंत्र है। यह लोगों को सभी प्रकार की बीमारियों से छुटकारा दिलाता है और सुख तथा कल्याण के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक शक्ति भी प्रदान करता है। प्रतिदिन सूर्य मंत्र का जाप करने से भी लोगों को समृद्धि प्राप्त करने में मदद मिलती है। यह न केवल लोगों के मन में आए आत्म-संदेह को दूर करता है बल्कि मानसिक संकटों को भी दूर करने में सहयोग करता है।

सूर्य मंत्र है:

नमः सूर्याय शान्ताय सर्वरोग निवारिणे आयुररोग्य मैस्वैर्यं देहि देवः जगत्पते ||

अर्थ - ब्रह्मांड के शासक सूर्य देव, आप सभी रोगों को दूर करने वाले हैं। मैं आपको नमन करता हूं और कृपया अपने भक्तों को लंबी उम्र, स्वास्थ्य और धन प्राप्ति का आशीर्वाद दें।

सूर्य मंत्र जाप के लाभ
  • यदि आप नियमित रूप से सूर्य मंत्र का जाप करते हैं, तो निश्चित रूप से आपको सूर्य देव की कृपा प्राप्त होगी।
  • आप बेहतर तरीके से और मजबूती से जीवन की बाधाओं और परेशानियों का सामना कर सकेंगे।
  • आपमें धैर्य बढ़ेगा जिससे बेहतरी के लिए आध्यात्मिक मार्ग पर चलना आसान हो जाएगा।
  • सकारात्मक सोच के साथ आपके विचार समृद्ध होंगे और आप अपने जीवन के प्रति कृतज्ञ महसूस करेंगे।
सूर्य मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समयसूर्योदय के दौरान
इस मंत्र का जाप कितनी बार करेंदिन में 3,7,9,108 व 1008 बार
इस मंत्र का जाप कौन कर सकता है?कोई भी
किस ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करेंपूर्व दिशा

2. सूर्य नमस्कार मंत्र (surya namaskar mantra)

सूर्य नमस्कार मंत्र (surya namaskar mantra) उस धारणा की सराहना करता है, जो एक व्यक्ति सूर्य को प्रदान करता है। आमतौर पर शरीर को शांत करने के लिए सूर्य नमस्कार किया जाता है। इसमें बारह आसन शामिल हैं, जो लगभग बारह और एक चौथाई वर्षों के सूर्य के चक्र को दर्शाते हैं। जिन जातकों को लगता है कि उनके शरीर में फूर्ति है, सूर्य नमस्कार मंत्रों का जाप करने से उन्हें बेहतर तरीके से तालमेल बैठाने में मदद मिलेगी। सूर्य मंत्र न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है बल्कि अपने अंतर्मन को खोजने और समझने में मदद करता है।

सूर्य नमस्कार के प्रत्येक मंत्र में अलग मुद्रा और आसन शामिल हैं और ये शरीर के विभिन्न हिस्सों को चार्ज करते हैं।

सूर्य नमस्कार मंत्र हैं:

ॐ मित्राय नमः।

अर्थ- हम प्रार्थना करते हैं, जो सभी के अनुकूल हो।

ॐ रवये नमः।

अर्थ- हम उज्ज्वल और दीप्तिमान की प्रार्थना करते हैं।

ॐ सूर्याय नमः।

अर्थ- हम उनसे प्रार्थना करते हैं जो जीवन से अंधकार को दूर करते हैं हमारे किए गए कर्म के लिए जिम्मेदार हैं।

ॐ भानवे नमः।

अर्थ-हम उनसे प्रार्थना करते हैं, जो हमारे जीवन को प्रकाशमान बनाते हैं।

ॐ खगाय नमः।

अर्थ- हम उससे प्रार्थना करते हैं जो सर्वव्यापी है, जो आकाश में घूमता है।

ॐ पुषणे नमः।

अर्थ- हम पोषण और शक्ति देने वाले से प्रार्थना करते हैं।

ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।

अर्थ- हम उनके लिए प्रार्थना करते हैं जिनके पास सुनहरे रंग हैं।

ॐ मरीचये नमः।

अर्थ- हम हमारे जीवन को प्रकाशमय बनाने वाले से प्रार्थना करते हैं।

ॐ आदित्याय नमः।

अर्थ- हम ब्रह्मांडीय दिव्य माता अदिति के पुत्र से प्रार्थना करते हैं।

ॐ सविरे नमः।

अर्थ- हम जीवन देने वाले से प्रार्थना करते हैं।

ॐ अर्काय नमः।

अर्थ- हम यश और कीर्ति देने वोले से प्रार्थना करते हैं।

ॐ भास्कराय नमः।

अर्थ- हम ज्ञान और प्रकाश देने वाले से प्रार्थना करते हैं।

सूर्य नमस्कार मंत्र जाप के लाभ
  • सूर्य नमस्कार मंत्र के नाम से जाना जाने वाला यह मंत्र जातक के जीवन में स्पष्टता लाता है।
  • यह लोगों को ऊर्जा प्रदाता के प्रति आभार व्यक्त करने में मदद करता है।
  • प्रतिदिन सूर्य मंत्र उच्चारित करने से जातक को आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है और इससे उनका आध्यात्मिक स्तर बढ़ता है।
  • सूर्य नमस्कार मंत्र करने से अपने चारों ओर एक शांत वातावरण महसूस होता है।
  • मंत्र आपको आराम करने और तनाव से दूर रखने में भी मदद करते हैं।
  • मंत्राें के नियमित उच्चारण से लोग अपने क्रोध पर नियंत्रण पाते हैं। इसके साथ ही उनका तन-मन स्वस्थ होता है।
सूर्य नमस्कार मंत्र के जाप करने का सर्वोत्तम समयसूर्योदय के दौरान
इस मंत्र का जाप कितनी बार करना करें12 मंत्र , 12 बार
सूर्य नमस्कार का जाप कौन कर सकता है?कोई भी
किस ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करेंसूर्य की ओर

3 सूर्य बीज मंत्र (surya beej mantra)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य बीज मंत्र (surya beej mantra) व्यक्ति को सूर्य देव से जुड़ने में मदद करता है। यह मंत्र आपको प्रसिद्धि और अच्छा स्वास्थ्य देने की शक्ति रखता है। साथ ही ऐसा माना जाता है कि यह आंखों की रोशनी में सुधार करता है और आंखों से संबंधित सभी प्रकार की बीमारियों और रोगों को दूर करता है। इसके अलावा, इस सूर्य मंत्र का जाप करने से जातकों को भगवान सूर्य की शरण में आने और उनकी दिव्य कृपा प्राप्त करने में मदद मिलती है।

सूर्य बीज मंत्र है:

।। ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ।।

अर्थ- मैं महान सूर्य देव को उनकी दिव्य कृपा के लिए संबोधित करता हूं।

सूर्य बीज मंत्र के जाप के लाभ
  • सूर्य बीज मंत्र के जरिए जातक अपने जीवन में संतुलन बनाए रख सकता है।
  • यदि आप इसका प्रतिदिन जाप करते हैं, तो आप सहजता से अध्यात्म के मार्ग पर जाने का तरीका खोज लेंगे।
  • इसके अलावा, वैदिक ज्योतिष में सूर्य मंत्र जातक को सूर्य देव का आशीर्वाद भी प्रदान करता है।
  • यह मंत्र उन्हें जीवन की प्रतिकूलताओं और मानसिक भ्रम से उबरने में भी मदद करता है।
  • सूर्य देव के बीज मंत्र का जाप करने से भी लोगों को शक्ति और आत्मविश्वास से भरे एक सामंजस्यपूर्ण जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
सूर्य बीज मंत्र के जाप करने का सर्वोत्तम समयसूर्योदय के दौरान
इस मंत्र का जाप कितनी बार करेंसर्वोत्तम परिणामों के लिए 40 दिनों में 7000 बार
सूर्य मंत्र का जाप कौन कर सकता है?कोई भी
किस ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करेंसूर्य यंत्र के सामने

अन्य शक्तिशाली सूर्य मंत्र

1. सूर्य गायत्री मंत्र (surya gayatri mantra)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सूर्य गायत्री मंत्र (surya gayatri mantra) व्यक्ति की कुंडली में सूर्य ग्रह के सभी नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करता है। सूर्य गायत्री मंत्र का उच्चारण भी आपको ऊर्जा और अच्छे स्वास्थ्य की तलाश में मदद करेगा। इसके अलावा, जब पूरी भक्ति और एकाग्रता के साथ सूर्य मंत्र पढ़ा जाता है, तो सकारात्मकता और दिव्यता के प्रदाता सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही ऐसा माना जाता है कि सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करने का सबसे अच्छा समय सूर्य ग्रहण के दौरान होता है।

सूर्य गायत्री मंत्र हैं:

।। ॐ भास्कराय विद्महे महादुत्याथिकराया धीमहि तनमो आदित्य प्रचोदयात् ।।

अर्थ- मुझे दिन के निर्माता सूर्य देव का ध्यान करने दो, मुझे उच्च बुद्धि दो और भगवान सूर्य को मेरे मन को रोशन करने दो।

।। ॐ आदित्याय विद्महे मार्त्तण्डाय धीमहि तन्न: सूर्य प्रचोदयात् ।।

अर्थ-मैं हजारों किरणों वाले सूर्य देव का ध्यान करता हूं। सूर्य देव मेरी बुद्धि को प्रकाशित करें।

।। ॐ सप्त-तुरंगाय विद्महे सहस्र-किरणाय धीमहि तन्नो रविः प्रचोदयात् ।।

अर्थ- जो सात घोड़ों के रथ पर सवार हो (सात रंग जो वर्णक्रम बनाते हैं) और जो हजारों किरणें पृथ्वी तक पहुँचती हैं, मैं आपको नमन करता हूँ।

सूर्य गायत्री मंत्र के जाप के लाभ
  • जब आप सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करते हैं, तो आपके आंखों की रोशनी बेहतर हो सकती है और त्वचा संबंधी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।
  • सूर्य ग्रहण के समय सूर्य मंत्र उच्चारण करने से जातक की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • प्रतिदिन सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करने से जातक के जीवन में पूर्ण सामंजस्य के साथ सकारात्मकता और अनुकूल समय संचित होता है।
  • बुरे विचारों से मन की शुद्धि भी सूर्य मंत्र का एक लाभ है।
  • इसके अलावा, यदि आप प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करते हैं तो आध्यात्मिकता और शांति के मार्ग की ओर झुकाव बढ़ता है।
सूर्य गायत्री मंत्र के जाप करने का सर्वोत्तम समयसूर्योदय के दौरान
इस मंत्र का जाप कितनी बार करें108 बार
सूर्य मंत्र का जाप कौन कर सकता है?कोई भी
किस ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करेंपूर्व दिशा

2. आदित्य हृदयम् मंत्र (aditya hrudayam mantra)

हृदय शब्द पोषण और उपचार का प्रतीक है। इस प्रकार, इस सूर्य मंत्र का जाप करने से लोगों को आदित्य की आत्मा और हृदय से जीवन में सकारात्मकता प्राप्त करने में मदद मिलती है। यह जातक को जीवन के हर क्षेत्र में हर तरीके से बेहतर करने और सफल होने में मदद करता है। इस मंत्र का प्रभाव ऐसा है कि यह जातकों को ज्ञान प्राप्त करने और उन्हें खुद को बेहतर बनाने में सहायता देता है। यह मंत्रों के उच्चारण करने वाले को शक्ति भी प्रदान करता है।

आदित्य हृदयं मंत्र है:

।। आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्

जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्।।

अर्थ- यह पवित्र मंत्र आदित्य हृदयं है जो सभी शत्रुओं का नाश करता है। इस मंत्र का नियमित जाप करने से आप विजयी होते हैं और जिंदगी में स्थायी सुख मिलता है।

आदित्य हृदयं मंत्र के जाप के लाभ
  • यदि आप प्रतिदिन आदित्य हृदयं मंत्र का उच्चारण करते हैं, तो इससे आपको अहंकार और क्रोध से छुटकारा मिलेगा।
  • साथ ही लोगों को नकारात्मकता और लालच से भी मुक्ति मिलेगी।
  • शुद्ध मन को प्राप्त करने की आपकी इच्छा में वृद्धि होगी।
  • इसके अलावा, इस मंत्र का प्रतिदिन जाप आपको आध्यात्मिकता और उपदेशों के श्रोता बनने के लिए प्रेरित करेगा।
  • सूर्य ग्रह के लिए यह मंत्र आपको निडर और आत्मविश्वासी भी बनाएगा, जो आपको जीवन में सफल होने में मदद करेगा।
आदित्य हृदयं मंत्र के जाप करने का सर्वोत्तम समयसूर्योदय के दौरान
इस मंत्र का जाप कितनी बार करें60 दिनों के लिए दिन में 6 बार
आदित्य हृदयं मंत्र का जाप कौन कर सकता है?कोई भी
किस ओर मुख करके मंत्र का जाप करेंपूर्व दिशा

सूर्य मंत्रों के जाप के समग्र लाभ

भगवान सूर्य के साथ जुड़ाव जातकों को कई क्षेत्रों में मदद करेगा। वैदिक ज्योतिष में किसी भी सूर्य मंत्र का जाप करने से लोगों को भगवान सूर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सूर्य मंत्र का जाप करने के अन्य लाभ इस प्रकार हैं:

  • सूर्य मंत्र (surya mantra) का जाप करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और यह मन को नकारात्मक विचारों से मुक्त करता है।
  • यह व्यक्ति में अच्छाईयों को बढ़ाता है और मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर करता है।
  • ज्योतिष में सूर्य मंत्र के जरिए जातक भगवान सूर्य का आभार व्यक्त करता है। इस तरह वह मानव जाति से बेहतर तरीके से जुड़ता है। इसके अलावा, वे निस्वार्थ हो जाते हैं और वे बेहतर उम्मीदों के साथ जीवन जीते हैं।
  • यह दृष्टि से संबंधित रोगों को ठीक करने में मदद करता है। वास्तव में, यह लोगों की आंखों की रोशनी में भी सुधार करता है।
  • सूर्य मंत्र का जाप करने का एक और लाभ यह है कि यह लोगों को अपना ध्यान मजबूत करने में मदद करता है। भगवान सूर्य लोगों को बुद्धि और ज्ञान प्रदान करते हैं और उन्हें अपने प्रयासों में सफलता का आनंद लेने देते हैं।
  • यह शांति के साथ-साथ व्यक्ति के शरीर को आराम भी देता है और जातक के जीवन को समृद्ध बनाता है।
  • नियमित सूर्य ग्रह के मंत्र का उच्चारण करने वाले निडर और आत्मविश्वासी जीवन जीते हैं। साथ ही ये जीवन में आई समस्याओं का धैर्य के साथ सामना करते हैं।


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ज्योतिष में वैदिक मंत्र

ज्योतिष में वैदिक मंत्र

ज्योतिष में मंत्रों का बहुत महत्व है। विशेष रूप से ज्योतिष में 9 ग्रहों के लिए मंत्र या नवग्रह मंत्र हैं। ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह का अपना एक महत्व है क्योंकि इन ग्रहों की सकारात्मकता या नकारात्मकता जातक के जीवन में लिए गए फैसलों को प्रभावित करती है। जैसा कि ज्योतिषी आपको बताएंगे कि जीवन में कुछ बेहतर करने या पाने के लिए ग्रहों, नक्षत्रों, वास्तु ऊर्जा और ईश्वर को प्रसन्न करना अच्छा रहता है। इन्हें प्रसन्न करने का एक तरीका है मंत्रों का उच्चारण।

ज्योतिष में वैदिक मंत्र क्या है?

इससे पहले कि हम ज्योतिष में मौजूद विभिन्न प्रकार के मंत्रों के बारे में जानें, सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि मंत्र क्या होते हैं? उनका उपयोग कैसे किया जाता है और उच्चारण या जाप कैसे किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी जानें कि जातक का मंत्रों के जाप से किस तरह के लाभ मिल सकते हैं?

हजारों वर्षों से प्राचीन वैदिक ज्योतिष (vedic jyotish) एक व्यक्ति के जीवन को आसान बनाने के बारे में रहा है। ऐसा करने के लिए वैदिक ज्योतिष में तीन प्रमुख उपाय हैं, मंत्र, यंत्र और रत्न।

मंत्र (mantra) जाप समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने का ना केवल सरल उपाय है बल्कि भगवान और ग्रहों को प्रसन्न करने के सबसे अच्छा तरीका भी है। वास्तव में, मंत्र जाप से आत्म संतुष्टि मिलती है और विचलित मन शांत होता है। इसलिए ज्योतिष में मंत्रों का केवल आध्यात्मिक लाभ ही नहीं होता बल्कि मनोवैज्ञानिक लाभ भी मिलता है।

वैदिक ज्योतिष में मंत्र पाठ्यक्रम या भजनों का एक संयोजन होता है। मंत्राें के सही उच्चारण से जातक को सार्वभौमिक ऊर्जा और आध्यात्मिक ऊर्जा पर केंद्रित करने में मदद मिलती है। मंत्र दुनिया में हजारों वर्षों से मौजूद हैं और वेदों सहित अतीत में लिखी गई कई धार्मिक पुस्तकों में इनका उल्लेख भी मिलता है। कई वर्षों में ऋषियों ने ज्योतिष में मंत्रों के पाठ के लाभों को महसूस किया है, वे मंत्रों की सूची में शामिल हो गए हैं।

मंत्र का सार इसके 'मूल शब्द' या बीज से आता है और इससे उत्पन्न शक्ति मंत्र शक्ति कहलाती है। मंत्र में प्रत्येक मूल शब्द किसी ग्रह या भगवान से जुड़ा होता है। मंत्र जाप शारीरिक रूप से आपको अपनी ध्वनि, श्वास और इंद्रियों पर केंद्रित करने के लिए प्रेरित करता है। मंत्रों द्वारा उत्पन्न ध्वनि में आपकी भावनाओं और आपके सोचने के तरीके को पूरी तरह से बदलने और आपको उच्च आध्यात्मिक स्तर पर ले जाने की क्षमता होती है। वास्तव में, नियमित रूप से मंत्रों का जाप व्यक्ति में आध्यात्मिक जागरूकता की भावना पैदा करता है और उसे जिंदगी को शांतिपूर्ण तरीके से जीने में मदद करता है।

आज योग के उद्भव और मानसिक, शारीरिक उपचार के रूप में इसकी विश्व स्तर पर स्वीकार्यता ने मंत्र जाप को एक प्रमुख मान्यता दी है। आज विज्ञान भी मंत्र की शक्ति पर विश्वास करता है। साथ ही लोगों के मन, शरीर, आत्मा की शांति और भलाई का अनुभव करने के लिए इसे अपने योग कार्यक्रम के साथ जोड़ने की सलाह देता है।

मन और मंत्रों के बीच संबंध

मंत्र आपको कई लाभ दिला सकते हैं। लेकिन अगर आपको लगता है कि मंत्रों का जाप आपकी जिंदगी में जादू की तरह काम करेगा और आपकी सभी समस्याओं को एक बार में ही फुर्र कर देगा, तो आपका बता दें कि यह आपका वहम है। अगर ज्योतिषी से आप यह पूछें कि मंत्र कैसे काम करता है, तो वह आपको बताएंगे कि यह आपके सोचने के तरीके को प्रभावित करता है। यह आपमें अच्छाई के लिए बदलाव लाता है। हालांकि, मंत्रों के इन अद्भुत लाभों को प्राप्त करने के लिए आपको रोजाना नियमित रूप से इनका जाप करना चाहिए।

'मंत्र' मूल रूप से प्राचीन संस्कृत भाषा का शब्द है। मंत्र दो शब्दों 'मन' और ‘त्र’ से मिलकर बना है। 'मन' का अर्थ है मन यानी चित्त और 'त्र' जिसका अर्थ है 'उपकरण या यंत्र'। इस प्रकार एक मंत्र और कुछ नहीं बल्कि सोचने का एक यंत्र है। जब आप अपनी क्षमताओं के बारे में सोचते हैं, तभी आप अपनी जिंदगी में आवश्यक परिवर्तन कर सकते हैं। लेकिन यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि आखिर हमारी सोचने की प्रक्रिया इतनी जटिल क्यों है? ज्योतिषियों का मानना है कि मनुष्य केवल बौद्धिक प्राणी नहीं है बल्कि भावनात्मक प्राणी भी है। मनुष्य को अपनी भावनात्मक कुशाग्रता के आधार पर निर्णय लेने की आदत होती है। इससे कई बार मन और भावनाओं का संतुलन बिगड़ जाता है। इस वजह से जातक कई बार फैसले लेने में भ्रमित हो जाता है। ऐसी स्थिति में मन को अपनी भावनाओं से जोड़ने के लिए मंत्र काम में आता है।

हमारा मन हमेशा कार्यशील रहता है। जबकि मंत्र जाप एक यंत्र के रूप में कार्य करता है और मन को कुछ देर के लिए स्थिर रखता है। इस तरह मन को कुछ देर के लिए विश्राम मिलता है। आप इसे इस तरह समझें, अगर अभी हमारा मन शांत होगा, तो हम अवचेतन मन से जुड़ पाएंगे। मंत्र हमें गहराई से सोचने के लिए जागरूक बनाता है, जिस वजह से हम अपनी जिंदगी में बेहतर निर्णय ले पाते हैं। आपको बताते चलें कि ज्योतिष में कुछ मंत्र केवल मधुर वाक्यांश हैं, जिनका कोई विशेष अर्थ भी नहीं है। उनका एकमात्र उद्देश्य किसी व्यक्ति की इंद्रियों को संगीत के रूप से ऊपर उठाना है, क्योंकि संगीत हमारी भावनाओं को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इस तरह, व्यक्ति मन और मस्तिष्क के बीच सही संतुलन से अपनी जिंदगी के लिए बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होता है।

मंत्रों का ज्योतिषीय महत्व

भारत में जन्में शायद ही किसी व्यक्ति ने अपने जीवन में कभी मंत्रों का जाप ना सुना हो। हमारे यहां मंदिर, विवाह समारोह, भूमि पूजन से लेकर कई घरेलू कार्यक्रमों में पंडितों द्वारा मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। असल में ग्रहों और देवताओं को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप किया जाता है। साथ ही यह उनसे आशीर्वाद मांगने का भी एक तरीका है। ज्योतिष में कई मंत्र हैं जो दैवीय शक्ति से जुड़ते हैं।

जिस प्रकार ज्योतिष में सभी ग्रहों के लिए एक मंत्र होता है, उसी प्रकार ज्योतिष में प्रत्येक चक्र के लिए भी मंत्र होते हैं। इसलिए यदि आपके शरीर में कोई भी चक्र अवरुद्ध हो जाता है या आवश्यक ऊर्जा को स्थानांतरित करने में सक्षम नहीं है, तो इसके साथ जुड़े मंत्र का उच्चारण इसे खोलने में मदद कर सकता है और इसकी जीवन शक्ति ऊर्जा को बढ़ा सकता है।

इसके अलावा, मंत्र उच्चारण कई धर्मों का एक अनिवार्य हिस्सा है। एक मंत्र का जाप करने से जातक को ब्रह्मांड में उस देवत्व से जुड़ने में मदद मिलती है जिसे वह सत्ताधारी शक्ति (भगवान) के रूप में मानता है। आपने फिल्मों में देखा होगा या अपने बड़ों (या योग में भी) से सुना होगा कि कैसे सर्वोच्च शक्ति से जुड़ने के लिए हमें सबसे पहले अपने विचारों को एक चीज पर केंद्रित करना होता है। मंत्रों का उच्चारण ऐसा करने में मदद करता है। यह हमारे दिमाग को शांत करता है और हमें उस स्थिति को प्राप्त करने में मदद करता है, जहां हम अपनी आंतरिक चेतना को महसूस कर सकते हैं। हालांकि ऐसा करना कठिन है, लेकिन हमारे पास इसके लिए एक योजना है। आइए जानते हैं, वह क्या है?

मंत्र की 40 दिनों की अवधारणा

जिस तरह किसी भी चीज को आदत में लाने के लिए 21 दिन लगते हैं, उसी तरह आपकी चेतना को आध्यात्मिकता और मानसिक शांति की ओर ले जाने में लगभग 40 दिन का समय लगता है। ज्योतिषियों का सुझाव है कि यदि आप मंत्र जाप का अभ्यास करना चाहते हैं तो 40 दिनों के चक्र में दिन में 108 बार मंत्र का जाप करना चाहिए। किसी व्यक्ति की चेतना में बदलाव करने के लिए कम से कम 40 दिन जाप करने की आवश्यकता होती है। मंत्र उच्चारण से सबसे अच्छा फल पाने के लिए ध्यान कंद्रित करना भी जरूरी होता है। इसके अलावा संख्या 108, नाड़ियों की संख्या को संदर्भित करती है, जिन्हें मंत्र के आनंदमय पहलुओं को महसूस करने के लिए सक्रिय होने की आवश्यकता होती है।

वैदिक मंत्रों के पाठ का इतिहास

अधिकांश मंत्र संस्कृत में इसलिए लिखे गए हैं क्योंकि संस्कृत के शब्द शुद्ध कंपन (स्पंदन) उत्पन्न करते हैं। संस्कृत में मंत्र लिखे होने की वजह से ये चक्र में अवरोध पैदा नहीं होने देते। मंत्रों का इतिहास 1000 ईसा पूर्व के ग्रंथों में देखे जा सकते हैं। 'ओम' शब्द सबसे छोटा और सरल मंत्र है। माना जाता है कि पृथ्वी में उत्पन्न होने वाली यह पहली ध्वनि है। इसे और सरल भाषा में समझें कि मंत्र आध्यात्मिक व्याख्याओं के साथ मधुर वाक्यांश होते हैं जैसे कि सत्य, वास्तविकता, प्रकाश, अमरता, शांति, प्रेम, ज्ञान और क्रिया।

आज मंत्र की संरचना और प्रकार धर्म के अनुसार भिन्न होते हैं - हिंदू धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म या सिख धर्म। लेकिन कहा जाता है, कि इनमें से अधिकांश मंत्र वैदिक विचारधारा से उत्पन्न हुए हैं। ऋग्वेद संहिता में लगभग 10552 मंत्र हैं, जिन्हें मंडल नामक दस पुस्तकों में वर्गीकृत किया गया है। एक मंत्र अलग-अलग रूप ले सकता है जिसमें (ऋग्वेद से छंद) और (सामवेद से संगीत मंत्र) शामिल हैं।

वैदिक काल से, ऋषियों द्वारा भजन, छंदों का वर्णन और पाठ किया जाता रहा है। हालाँकि, ऋषि इन मंत्रों के निर्माता नहीं हैं। वे केवल मंत्रों के अपने ज्ञान को दूसरों से साझा करते हैं। मंत्रों के निर्माण के लिए वैदिक कवियों को श्रेय देना चाहिए। वैदिक कवि कविताओं से प्रेरित थे और उन्हें जड़ धी के रूप में संदर्भित किया, जो हिंदू धर्म के ध्यान में विकसित हुआ।

मध्य वैदिक काल में, मंत्र सभी वैदिक रचनाओं से प्राप्त हुए थे। उनमें (ऋग्वेद से छंद), सामन (सामवेद से संगीत मंत्र), यजुस (यजुर्वेद से एक विकृत सूत्र) और निगड़ा (एक जोर से बोली जाने वाली यजुस) शामिल थे।

इसके बाद लोगों की कई जरूरतों को पूरा करने के लिए हिंदू महाकाव्यों की अवधि के दौरान वेदों में वृद्धि हुई। वास्तव में, तांत्रिक विद्यालयों सहित मंत्रों के विभिन्न विद्यालयों का उदय हुआ। लिंग पुराण में, मंत्र को भगवान शिव के 1008 नामों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

ज्योतिष में मंत्रों के प्रकार

सदियों से मंत्रों में विविधता आई है और निश्चित रूप से इस सूची में बहुत कुछ शामिल भी हुआ है। वास्तव में मंत्रों को लोगों की आवश्यकताओं के अनुसार वर्गीकृत किया गया है। इसलिए वर्गीकरण के साथ विभिन्न प्रकार के मंत्र उभरे हैं। ये मंत्र ज्योतिष में ग्रहों, देवताओं, नक्षत्रों और प्रेम, विवाह, स्वास्थ्य आदि जैसे कई अन्य पहलुओं से जुड़े हैं। कुल मिलाकर, आज ज्योतिष में लगभग 70 मिलियन मंत्र हैं। समझाने वाले के तरीके पर यह बात निर्भर करती है कि ये मंत्र आपके लिए काम करेंगे या नहीं। कोई भी एक मंत्र किसी दूसरे मंत्र से बेहतर या कमतर नहीं होता।

जब मंत्रों के प्रकार की बात की जाती है, तो यहां तीन प्रकार के मंत्र हैं, बीज मंत्र, सगुण मंत्र और निर्गुण मंत्र।

1. बीज मंत्र (beej mantra)

सबसे पवित्र मंत्रों में से एक 'ओम' है। यह एक बीज मंत्र है, जिसका अर्थ है एक बीज ध्वनि जो सभी मंत्रों का आधार बनती है। ओम एक सार्वभौमिक बीज मंत्र है क्योंकि इसे विभिन्न धर्मों में स्थान मिला है। कई और भी बीज मंत्र हैं जो ज्योतिष में अन्य सभी मंत्रों का आधार बनते हैं। इनमें से प्रत्येक बीज मंत्र किसी न किसी देवता से जुड़ा हुआ है। जब ध्यान और भक्ति के साथ जप किया जाता है, तो बीज मंत्र किसी भी जातक की इच्छा को पूरा करने में मदद करते हैं।

अन्य बीज मंत्र हैं

क्रीं - करीम बीज मंत्र देवी काली से जुड़ा है। इस बीज मंत्र का जाप करने से जातक को आत्मविश्वास मिलता है। करीम बीज मंत्र का जाप करने से शक्ति और ज्ञान की प्राप्ति भी होती है।

श्रीं - इस बीज मंत्र का संबंध महालक्ष्मी से है। इस मंत्र के जाप से जातक को सामाजिक प्रतिष्ठा और धन की प्राप्ति होती है।

ह्रौं - यह बीज मंत्र शिव से जुड़ा है। हौं बीज मंत्र का जाप करने से जातक को मृत्यु, निराशा, रोग आदि से लड़ने में मदद मिलती है। यह बीज मंत्र मुक्ति की प्राप्ति में मदद करता है।

दूं - देवी दुर्गा का बीज मंत्र है दूं। इस बीज मंत्र का जाप करने से मनोकामना पूर्ति होती है। यह बीज मंत्र जातक को शक्ति भी प्रदान करता है।

ह्रीं - ह्रीं बीज मंत्र का संबंध देवी भुवनेश्वरी से है। यह मंत्र आपको शिव और पार्वती का आशीर्वाद देते हैं, जो कि जातक के जीवन से दुखों को दूर करने में मदद करता है।

ऐं - यह मंत्र देवी सरस्वती से जुड़ा हुआ है। यह बीज मंत्र जातक को साहस, आत्मविश्वास और संचार कौशल हासिल करने में मदद करता है।

गं - भगवान गणेश का बीज मंत्र गं है। इस मंत्र के जाप से जातक के जीवन में ज्ञान और सुख की प्राप्ति होती है।

फ्रौं - फ्रौं बीज मंत्र भगवान हनुमान से जुड़ा है। यह बीज मंत्र जातक को शक्ति और सुरक्षा देता है और उसके डर को दूर करने में उसकी मदद करता है।

दं - दं भगवान विष्णु का बीज मंत्र है। इस मंत्र का जाप करने से जातक को सुखी वैवाहिक जीवन, धन और अच्छे स्वास्थ्य की प्रचुरता प्राप्त करने में मदद मिलती है।

भ्रं - शक्तिशाली बीज मंत्र भगवान भैरव से जुड़ा है। यह बीज मंत्र जातक को किसी भी तरह के कोर्ट केस से निपटने में मदद करता है और जातक को प्रसिद्धि भी दिलाता है।

धूं - धूं बीज मंत्र का संबंध देवी धूमवती से है। मंत्र जाप से जातक को शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।

2. सगुण मंत्र (saguna mantra)

सगुण एक संस्कृत शब्द है। इसका अर्थ है, "गुणों के साथ" या "गुण युक्त।" सगुण मंत्रों को देवता मंत्र कहा जाता है, क्योंकि वे अक्सर परमात्मा के किसी न किसी रूप पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

3. निर्गुण मंत्र (nirguna mantra)

निर्गुण मंत्र, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे वैदिक ग्रंथों से उत्पन्न हुए हैं और इस प्रकार यह सबसे पुराने मंत्र हैं। इन शब्दों से किसी देवता का आह्वान नहीं किया जाता है। निर्गुण मंत्रों की व्याख्या करना बहुत कठिन है और माना जाता है कि उनका कोई विशिष्ट रूप या अर्थ नहीं है। कहा जाता है कि इन मंत्रों की पूरी सृष्टि के साथ अपनी पहचान है और योग दर्शन में मौलिक सत्य समाहित हैं। ऐसा कहा जाता है कि अमूर्त निर्गुण मंत्रों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होने के लिए मस्तिष्क का मजबूत होना बहुत जरूरी है।

मंत्र जाप के लाभ

ज्योतिष के अनुसार पूजा-प्राथर्ना या अन्य अनुष्ठानों के दौरान देवताओं की प्रार्थना करने, मंत्र जाप करने से कई लाभ होते हैं। ज्योतिष के अनुसार मंत्र जाप के कुछ लाभ इस प्रकार हैं।

  • हम सबके जन्म के साथ कुंडली में कुछ ऐसे ग्रह विराजमान होते हैं, जिसकी वजह से हमाररी स्थिति दुर्बल हो जाती है। इससे हामरा विकास भी प्रभावित होता है। कमजोर ग्रहों को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप करना एक उपाय है। हर ग्रह के लिए ज्योतिष में मंत्र हैं।
  • वास्तव में, मंत्रों का उपयोग लाभकारी ग्रहों को प्रसन्न करने और आपकी कुंडली में उन्हें और मजबूत करने के लिए भी किया जा सकता है।
  • मंत्रों की सबसे अच्छी बात यह है कि वे केवल सकारात्मक प्रभाव देते हैं।
  • मंत्र स्वास्थ्य, धन, सुख, प्रेम और सफलता को आकर्षित करने में आपकी मदद कर सकते हैं।
  • कुछ मंत्रों का जाप करने से आलस्य, रोगों और परेशानियों को दूर करने में मदद मिल सकती है।
  • कई मनोचिकित्सकों का मानना है कि मंत्र जाप तनाव को कम करने में मदद करता है।
  • इसके अतिरिक्त, मंत्र जाप आपके दिमाग को क्लियर करता है और तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।
  • मंत्रों का जाप और ध्यान हृदय गति को धीमा करने में मदद करता है और इसके परिणामस्वरूप रक्तचाप का स्तर कम होता है।
  • मंत्रों के जाप से मन को आराम मिलता है, इससे ऑक्सीजन की खपत भी कम होती है।
  • मंत्रों का जाप गहरी नींद के माध्यम से आराम प्राप्त कराने में मदद करता है।
  • ध्यान करने वालों का विचार है कि कुछ शब्दांशों के जप के कंपन से गहरी ध्यान की स्थिति पैदा हो सकती है, जो किसी भी अवरुद्ध ऊर्जा को मुक्त करने या चक्रों को खोलने में मदद करती है।
  • मंत्र ध्यान मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। आप चीजों को बेहतर तरीके से और लंबे समय तक बनाए रखने में सक्षम हो सकते हैं।
  • ध्यान करते समय किसी मंत्र को दोहराने से आपको सांस लेने की प्राकृतिक लय खोजने में भी मदद मिल सकती है।
  • दैनिक आधार पर मंत्र जप से आपका मूड अच्छा हो सकता है।

ज्योतिष में ग्रहों के लिए मंत्र

नवग्रह, नौ ग्रह हैं जो ज्योतिष के अनुसार पृथ्वी पर प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली पर शासन करते हैं। इन ग्रहों का प्रभाव ही किसी भी जातक के भाग्य का फैसला करने में मदद करता है। आपकी कुंडली में ग्रह कैसे या किसके साथ है, इसके आधार पर ग्रह का प्रभाव या तो सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है। उदाहरण के लिए कुंडली में एक ग्रह नकारात्मक जगह में स्थित हो सकता है या नकारात्मक संकेत लिए हो सकता है। नतीजतन इसके परिणाम भी बुरे हो सकते हैं। ऐसी स्थितियों में अपने जीवन में किसी ग्रह के बुरे प्रभावों का मुकाबला करने के लिए मंत्र का प्रयोग बल के रूप में करने से मदद मिल सकती है। इसलिए ज्योतिष में सभी नौ ग्रहों के लिए मंत्र हैं।

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Wednesday, 1 November 2023

ग्रह गोचर 2023: Grah Gochar 2023

ग्रह गोचर 2023: Grah Gochar 2023

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब ग्रह अपनी स्थिती में परिवर्तन करते हैं, तो उसे "गोचर" कहा जाता है। जब ग्रह एक भाव से दूसरे भाव में या एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं, तो यह कुछ प्रभाव दिखाता है, जो व्यक्ति की जन्म कुंडली के अनुसार अच्छा या बुरा हो सकता है। प्रत्येक ग्रह की सूर्य के चारों ओर अपनी गति होती है और गोचर का समय एक ग्रह से दूसरे ग्रह में भिन्न होता है। गोचर की अवधि के दौरान ग्रह अस्त या वक्री हो सकते हैं। आमतौर पर राहु, केतु ग्रहों के गोचर को चंद्र ग्रहण कहा जाता है, बृहस्पति और शनि ग्रह का लंबे समय तक चलने वाला प्रभाव होता है। चंद्रमा और बुध जैसे ग्रहों का गोचर, निकट के ग्रह त्वरित परिवर्तन लाते हैं। ग्रहों के गोचर और उनके प्रभावों का अध्ययन हमेशा किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के संदर्भ में किया जाता है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ग्रह गोचर ज्योतिष में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि सभी नवग्रह हमारे जीवन को विशिष्ट तरीकों से प्रभावित करते हैं। साथ ही चंद्रमा, सूर्य, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु कुछ ऐसे ग्रह होते हैं, जिन्हें वैदिक ज्योतिष में प्रमुख माना जाता है। वहीं एक राशि से दूसरी राशि में उनकी गतिविधियों का हमारे लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है। हमारे जीवन में होने वाली सभी घटनाओं के लिए इन ग्रहों की चाल को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, यह हमारे जीवन में बड़े से लेकर छोटे बदलाव लाते हैं। साथ ही ये हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करने में भी सक्षम होते हैं।

उदाहरण के लिए चंद्रमा मन का कारक है। इसी तरह सूर्य को एक शाही ग्रह के रूप में माना जाता है और हमारी कुंडली में सरकारी नौकरी और सेवाओं की संभावनाओं के लिए जिम्मेदार होता है। शुक्र ग्रह प्रेम और विवाह के कारक के रूप में जाना जाता है और इसी तरह बुध ग्रह हमारी बौद्धिक क्षमताओं का प्रतीक है। बृहस्पति ग्रह प्रमुख रूप से स्वास्थ्य को दर्शाता है और शनि हमारे "कर्म" या कार्यों को हिसाब रखता है और उनके अनुसार परिणाम उत्पन्न करता है। इसलिए हमारे लिए उनकी गोचर तिथि और समय को जानना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि उन परिवर्तनों पर नज़र रख सकें, जो शायद हमारे भविष्य में देखने को मिल सकते हैं।

आपको ज्ञात होगा कि प्रत्येक ग्रह एक ही गति से नहीं चलता है। कुछ धीरे-धीरे चलते हैं और कुछ ग्रह काफी तेज गति से चलते हैं। उदाहरण के लिए शनि ग्रह बहुत धीमी गति से चलता है। जबकि बुध ग्रह बहुत तेज गति से गोचर करता है। किसी व्यक्ति द्वारा बुध ग्रह की गतिविधियों पर नज़र रखना असंभव होता है। लेकिन वे हमारे लिए और हमारे जीवन में हो रहे परिवर्तनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, ताकि आपके लिए चीजों को और अधिक आसान बनाया जा सके।

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ग्रह गोचर 2023 और उनका समय

ग्रह गोचर 2023गोचर में लगने वाला समय
सूर्य ग्रहएक महीना
मंगल ग्रह45 दिन
बुध ग्रह21 दिन
बृहस्पति ग्रह12.5 महीने
शुक्र ग्रह26 दिन
शनि ग्रह2.5 वर्ष
राहु और केतु19 महीने
चंद्र ग्रह2.25 दिन

आज आप विभिन्न ज्योतिष वेबसाइटों से ग्रहों के गोचर के बारे में जान सकते हैं। लंबी महादशा एक व्यापक समय सीमा निर्धारित करती है, जिसमें अंतरदशा परिणाम और उनके समय को कम कर देती है। दशाओं के दौरान ग्रहों का गोचर अपेक्षित परिणाम की संभावना को और भी कम कर देता है। और सभी ग्रह गोचर में समय का काफी अंतर होता है।

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का गोचर कैसे कार्य करता है?

राशि चक्र में प्रत्येक ग्रह का अपना समय होता है। कुछ लंबे समय तक गोचर करते हैं, जबकि कुछ थोड़े समय के लिए वक्री रहते हैं। तेज गति से चलने वाले ग्रह "आंतरिक ग्रह" हैं और इसमें सूर्य, चंद्रमा, बुध, मंगल और शुक्र ग्रह शामिल हैं। और वे ग्रह जिनका गोचर लंबा है और जो आपको लंबे समय तक उनके प्रभाव का अनुभव कराते हैं, वे "बाहरी ग्रह" हैं, इनमें बृहस्पति, शनि, राहु और केतु ग्रह शामिल हैं।

अपने प्राकृतिक गोचर के दौरान किसी विशेष ग्रह की एक राशि में स्थिति के कुछ अलग प्रभाव हो सकते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वे आपकी कुंडली में बहुत अधिक महत्व नहीं रखते हैं। हालांकि, ऐसा होता नहीं है। ज्योतिष भविष्यवाणियां करते समय किसी भी ग्रह गोचर की अनदेखी नीं करते हैं, क्योंकि कुछ गोचर आपकी जन्म कुंडली के अन्य कारकों की तुलना में आप पर अधिक प्रभाव डाल सकते हैं। ग्रहों के सभी गोचर न केवल महत्वपूर्ण हैं, बल्कि आपके जीवन को सबसे अप्रत्याशित तरीके से बदल सकते हैं। इसलिए सभी ग्रहों के गोचर पर नजर रखना काफी महत्वपूर्ण होता है। अपने जीवन पर इसके प्रभाव और अन्य विवरणों को जानने के लिए आपको इस लेख को पूरा पढ़ना होगा, ताकि आप साल 2023 के ग्रह गोचर (grah gochar 2023) के बारे में जान सकें।

सूर्य गोचर 2023

वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य को 'ग्रहों का राजा' माना जाता है और यह व्यक्ति की आत्मा, स्वयं, व्यक्तित्व, अहंकार और अद्वितीय विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता है। जन्म कुंडली में सूर्य की स्थिति यह तय करती है कि व्यक्ति अपने जीवन में कितना प्रभावशाली या शक्तिशाली होता है। साथ ही सूर्य को एक शक्तिशाली ग्रह माना जाता है, जो व्यक्ति के पिता, अन्य पुरुष प्रभावकों, स्वास्थ्य, बाहरी रूप और व्यवहार संबंधी लक्षणों को नियंत्रित करता है। सूर्य ग्रह चुनौतियों का सामना करने की शक्ति भी देता है और व्यक्ति के व्यक्तित्व और गुणों को बढ़ाता है।

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मंगल गोचर 2023

वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को क्रूर और ऊर्जावान ग्रह के रूप में जाना जाता है। यह वह ग्रह है, जो जातक के दिमाग और बुद्धि को तेज करता है। इसके प्रभाव से मनुष्य अपनी जीवन यात्रा में साहसी कार्य करता है, क्योंकि मंगल साहस का कारक है। पौराणिक ग्रंथों में, मंगल ग्रह को भूमि पुत्र कहा गया है, इसलिए मंगल को भौम भी कहा जाता है।

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बुध गोचर 2023

वैदिक ज्योतिष के अनुसार नई ग्रह प्रणाली में बुध ग्रह को राजकुमार का दर्जा दिया गया है और यह विशेष रूप से बुद्धि, विवेक, वाणी, व्यापार और संचार का कारक ग्रह है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत हो, तो उसे व्यापार में लाभ मिलता है और उसकी तर्क शक्ति बहुत मजबूत होती है। ऐसे व्यक्ति की रुचि ज्ञान प्राप्त करने की ओर होती है और व्यक्ति की अपने भविष्य के बारे में दूरगामी सोच होती है।

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बृहस्पति गोचर 2023

वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को अधिक शुभ ग्रह माना गया है। बृहस्पति को देव गुरु भी कहा जाता है और यह ज्ञान, कर्म, धन, पुत्र और विवाह का कारक है। बृहस्पति के प्रभाव से जातक का मन धर्म और आध्यात्मिक कार्यों में अधिक लगा रहता है। यदि आपकी कुंडली में गुरु शुभ है, तो कठिन परिस्थितियों में भी आपको सहयोग मिलता है।

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शुक्र गोचर 2023

ज्योतिष के नौ ग्रहों में से एक शुक्र ग्रह भी है, जिसे भाग्य का कारक माना जाता है। शुक्र ग्रह के स्वामी स्वयं देवी लक्ष्मी हैं। शुक्र को स्त्री ग्रह माना जाता है। कुंडली के अन्य ग्रहों की तरह शुक्र भी जातक की कुंडली पर अपना अपना प्रभाव दिखाता है।

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शनि गोचर 2023

न्याय और कर्म के देवता शनि को सभी ग्रहों में विशेष माना जाता है। सभी के साथ न्याय करना उनकी मुख्य जिम्मेदारी है। यह वात-श्लेष्म प्रकृति, काला रंग और वायु तत्व का स्वामी है। शनि को शारीरिक बल, उदारता, विपत्ति, योग साधना, संप्रभुता, ऐश्वर्य, मोक्ष, यश, नौकरी, मूर्च्छा आदि का कारक ग्रह माना गया है।

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राहु गोचर 2023

वैदिक ज्योतिष में राहु को क्रूर ग्रह माना गया है। राहु भले ही खगोलीय रूप से ग्रह न हो। लेकिन ज्योतिष में राहु का बहुत महत्व है। राहु ग्रह एक हानिकारक ग्रह माना जाता है, क्योंकि इस ग्रह की दशा जातक के लिए शुभ नहीं होती। जब भी राहु गोचर करता है, तो इसके कारण बाकी राशियों पर नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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केतु गोचर 2023

राहु के साथ केतु का भी नाम रखा गया है, क्योंकि दोनों एक दूसरे के विपरीत बिंदुओं पर समान गति से चलते हैं। राहु-केतु के गोचर का जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। ये ग्रह एक साथ राशि बदलते हैं और हमेशा टेढ़े-मेढ़े चलते हैं।

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चंद्र गोचर 2023

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा सबसे तेज गति वाला ग्रह माना जाता है और चंद्रमा ढाई दिन में राशि बदलता है। इसलिए यह ग्रह प्रत्येक राशि पर अपने गोचर के अनुसार प्रभाव डालता है। हालांकि, यह प्रभाव अल्पकालिक है। कभी-कभी दो ग्रह एक ही राशि में आकर योग का निर्माण करते हैं। कुछ योग शुभ होते हैं, तो कुछ अशुभ। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का स्वामी माना गया है। चंद्रमा के प्रभाव से जातक का मन बेचैन या स्थिर हो जाता है। मुश्किलें हर काम में आती हैं। चंद्र परिवर्तन सभी राशियों को प्रभावित करता है।

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Grah Gochar 2023: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साल 2023 में कौन सा ग्रह गोचर सबसे महत्वपूर्ण है?

साल 2023 में शनि का गोचर सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस गोचर का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में 2.5 साल तक रहता है, जो सबसे लंबी अवधि होती है।

ग्रहों के गोचर की अवधि क्या होती है?

ग्रह की अवधि जितनी लंबी होती है, आपकी जन्म कुंडली में उसका प्रभाव उतना ही अधिक होता है। ग्रहों के चरण चाहे प्रत्यक्ष या वक्री हों, कुछ दिनों (चंद्रमा के लिए) 2 से 2.5 वर्ष (शनि के लिए) तक कहीं भी रह सकते हैं।

साल 2023 में कौन सा ग्रह प्रेम के लिए अनुकूल है?

किसी व्यक्ति के लिए यदि 2023 में बृहस्पति का गोचर पहले और सातवें भाव में होता है, तो यह व्यक्तिगत प्रगति के साथ-साथ सभी रिश्तों के प्रति उनके दृष्टिकोण को उत्साह और वृद्धि प्रदान करेगा। आप अपने जीवन में सहायक व्यक्तियों को अधिक स्वेच्छा से स्वीकार करेंगे, जो कठिन समय में बढ़ने में आपकी सहायता करते हैं, जिसमें अक्सर प्रेम संबंध शामिल होते हैं।

वर्ष 2023 में बृहस्पति के लिए कौन सा भाव शुभ है?

साल 2023 में बृहस्पति का गोचर 1, 5वें, 8वें, 9वें या 12वें भाव में होने पर अच्छे परिणाम देगा। हालांकि, 6 वां, 7 वां और 10 वां भाव इसके लिए अशुभ भाव हैं। इसके अलावा, जब किसी व्यक्ति की कुंडली के दशम भाव में शुक्र या बुध स्थित हो, तो बृहस्पति अशुभ परिणाम दे सकता है।

साल 2023 में कौन से ग्रह गोचर धन वृद्धि से जुड़े हैं?

बृहस्पति और शुक्र का दूसरे और आठवें भाव में गोचर आमतौर पर धन से संबंध रखता है। अष्टम भाव में शुक्र ग्रह बिक्री के लिए अनुकूल अवधि का प्रतीक है। और काम से जुड़ी योजना को क्रियान्वित करने के लिए समय उत्तम रहेगा।

वर्ष 2023 मंगल का गोचर किस भाव में प्रभावी रहेगा?

सप्तम भाव में मंगल ग्रह साहस, शक्ति, ऊर्जा और पराक्रम का ग्रह है और सप्तम भाव आपके साथी का भाव है। इसलिए जब मंगल का गोचर इस भाव में होता है, तो यह जातक में अधिक ऊर्जा और आक्रामकता लाता है। हालांकि, यह विवाह में देरी और प्रतिबंध का कारण बन सकता है।

साल 2023 शनि गोचर के लिए शुभ भाव कौन सा है?

साल 2023 में शनि का गोचर दूसरे, तीसरे और सातवें से बारहवें भाव में शुभ रहेगा, जबकि शनि को पहले, चौथे, पांचवें और छठे भाव में अशुभ माना जाता है। साथ ही सूर्य, चंद्रमा और मंगल शत्रु ग्रह हैं और शुक्र, बुध और राहु मित्र ग्रह हैं और बृहस्पति और केतु इसके लिए तटस्थ हैं।

बुध गोचर 2023 तिथि, समय और भविष्यवाणियां

बुध गोचर 2023 तिथि, समय और भविष्यवाणियां

बुध को राशि चक्र का एक चक्कर पूरा करने में लगभग 12 महीने का समय लगता है। यह प्रत्येक राशि में 30 दिन तक रहता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी चाल सीधी है या वक्री। जन्म के समय चंद्रमा जिस स्थान से दूसरे, चौथे, छठे, आठवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में स्थित हो, तो बुध शुभ फल देता है। जबकि चन्द्रमा से शेष स्थानों पर अर्थात प्रथम, तृतीय, 5वें, 7वें, 9वें और 12वें भाव पर इसका प्रभाव मिश्रित होता है। विशेषकर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। इस लेख में हम इस संबंध में आपको विस्तृत विवरण देंगे और बताएंगे कि बुध का गोचर आपके जीवन को कैसे प्रभावित कर सकता है, जिसके आधार पर यह जन्म के चंद्रमा से किस भाव में गोचर करता है।

बुध गोचर का क्या अर्थ है?

बुध ग्रह व्यक्ति की बुद्धि, ज्ञान, भाव और संचार कौशल का प्रतिनिधित्व करता है। इस ग्रह को अमूमन तटस्थ यानी स्थिर ग्रह के रूप में माना जाता है, क्योंकि यह न तो लाभकारी प्रभाव देता है और न ही हानिकारक। बुध या तो सूर्य के समान भाव का साझा करता है या सूर्य के बगल के घर में स्थित होता है। यह भी माना जाता है कि बुध ग्रह लगभग 1 महीने में गोचर करता है। विभिन्न राशियों में बुध गोचर के ज्योतिषीय प्रभाव और आपके व्यवसाय, करियर, शिक्षा, प्रेम और पारिवारिक जीवन पर इसके प्रभाव को जानने के लिए लेख आगे पढ़ें।

बुध गोचर 2023 (Budh Gochar 2023)

तिथिबुध गोचरसमय
07 फरवरी 2023, मंगलवारबुध गोचर मकर में07:38
27 फरवरी 2023, सोमवारबुध गोचर कुंभ में16:55
16 मार्च 2023, गुरुवारबुध गोचर मीन में10:54
31 मार्च 2023, शुक्रवारबुध गोचर मेष में15:01
07 जून 2023, बुधवारबुध गोचर वृषभ में19:58
24 जून 2023, शनिवारबुध गोचर मिथुन में12:48
08 जुलाई 2023, शनिवारबुध गोचर कर्क में12:19
25 जुलाई 2023, मंगलवारबुध गोचर सिंह में04:38
01 अक्टूबर 2023, रविवारबुध गोचर कन्या में20:45
19 अक्टूबर 2023, गुरुवारबुध गोचर तुला में01:23
06 नवंबर 2023, सोमवारबुध गोचर वृश्चिक में16:32
27 नवंबर 2023, सोमवारबुध गोचर धनु में06:02
28 दिसंबर 2023, मंगलवारबुध गोचर वृश्चिक में10.39

प्रथम भाव में बुध गोचर का प्रभाव

यदि बुध जन्म के चंद्रमा से प्रथम भाव में गोचर करता है, तो यह जातक के जीवन में तनाव के स्तर को बढ़ाता है। बुध का प्रथम भाव में गोचर जातक के लिए अशुभ फल देने वाला माना जाता है। इस समयावधि में जातक बुरे कर्मों में लिप्त होता है। इस वजह से उसे अपने मित्रों से उचित सहयोग नहीं मिलता। यही नहीं, जातक को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। नतीजतन जातक आत्मविश्वास खो देता है। जिस वजह से जीवन में समस्याओं से पार पाने की उम्मीद खत्म हो जाती है। इस समयावधि में व्यक्ति बुरे लोगों की संगति में रहने लगता है, जो उसकी समस्याओं और बढ़ाता है।

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जातक मानसिक पीड़ा से ग्रस्त रहता है। मानसिक संतुलन स्थिर न होने की वजह से जातक बेवजह के खर्च कर बैठता है। इन दिनों जातक को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ेगा जैसे उसे मुंह के विभिन्न रोग हो सकते हैं। यह ज्यादा गंभीर न हो, इसके लिए लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क अवश्य करें। यह समय आपके लिए अच्छा नहीं है, ऐसे में जातकों को चाहिए कि किसी अन्य व्यक्ति के साथ संभलकर बातचीत करें। किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए आपको इस अवधि के दौरान अपने स्वभाव को लचीला बनाए रखना चाहिए। इन दिनों आप लंबी दूरी की यात्रा से बचें।

उपाय:

  • परिवार की सबसे बुजूर्ग महिला को हरी चूड़ियां या साड़ी उपहार में दें।

द्वितीय भाव में बुध गोचर का प्रभाव

यदि बुध जन्म के चंद्रमा से दूसरे भाव में गोचर करता है, तो यह आपकी आय में अच्छी वृद्धि करता है। इस दौरान आपको अपने सहकर्मियों और दोस्तों से अपने काम को लेकर काफी सराहना मिलेगी। आप लंबे समय से जो भी चीज सीखना चाह रहे हैं, उसमें सफलता मिलेगी। इस लिहाज से छात्रों के लिए यह समय अनुकूल रहेगा। इन दिनों ज्ञान अर्जित का भी अच्छा अवसर है। आप चाहें नौकरीपेशी हों या अपना व्यवसाय चला रहे हों। दोनों ही स्थिति में आपको अपने सहयोगियों से काफी सीखने को मिल सकता है। इससे आप काम के प्रति प्रेरित रहेंगे और आपमें आगे बढ़ने की चाह दिनों दिन बढ़ती रहेगी। चूंकि इन दिनों आप उत्साह से भरे रहेंगे, इस वजह से आप अत्यधिक काम करेंगे।

नतीजतन आपकी आय में भी वृद्धि की संभावना है। आपके प्रति परिवार के सदस्यों का रवैया अच्छा रहेगा। आप अच्छे लोगों की संगति में रहेंगे। आप सभी सांसारिक सुखों का आनंद लेंगे। इन दिनों आपको कुछ परोपकारी कार्य करने का मौका मिलेगा, जिससे समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। इससे आपको आंतरिक खुशी का अहसास होगा। आपके इसी स्वभाव के कारण लोग स्वत: ही आपकी ओर आकर्षित होंगे। आपके किसी रिश्तेदार का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होगा । इस दौरान छोटे भाई-बहन भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं। इसलिए आपको चाहिए कि उनका पूरी तरह ध्यान रखें।

उपाय:

  • घर से निकलते वक्त माथे पर चंदन का टीका जरूर लगाएं।

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तृतीय भाव में बुध गोचर का प्रभाव

जब बुध जन्म के चंद्रमा से तीसरे भाव में गोचर करता है, तो आपको किसी प्रकार की कमजोरी और स्वास्थ्य में गिरावट महसूस हो सकती है। इन दिनों आप कुछ हताशा और निराशा से घिरे हुए रहेंगे। आपके शत्रु आपकी कमजोरी का फायदा उठाएंगे और आपकी सफलता के बीच बाधा डालने की कोशिश कर सकते हैं इसलिए इन सबके लिए पहले से ही तैयार रहें। यात्रा करने के लिए यह एक अनुकूल गोचर नहीं है। जीवनसाथी के साथ भी आपका विवाद बढ़ सकता है। इसलिए अपशब्दों के प्रयोग से बचें। अपने गुस्से को नियंत्रण में रखें।

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जरूरी न हो तो किसी भी बात को विवाद तक लेकर न जाएं। असल में, इन दिनों आप सभी रिश्तों में किसी न किसी तरह की परेशानी का सामना करेंगे। फिर चाहे वह सहकर्मी हो या रिश्तेदार। आपको वरिष्ठों के साथ किसी भी बहस में शामिल होने से भी बचना चाहिए। अधिक खर्च के कारण कुछ वित्तीय अशांति भी हो सकती है। हालांकि इस समयावधि में आप नए लोगों के साथ संबंध विकसित करेंगे, जिनसे आपको काफी लाभ पहुंचेगा। इसके बावजूद आप मानसिक तनाव और अवसाद से पीड़ित हो सकते हैं। लंबी दूरी की यात्रा से बचना चाहिए। कुल मिलाकर बुध का यह गोचर जातक के लिए मिश्रित रहेगा।

उपाय:

  • छोटी उंगली में पन्ना धारण करना आपके लिए लाभकारी हो सकता है।

चतुर्थ भाव में बुध गोचर का प्रभाव

यदि बुध जन्म के चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गोचर करता है, तो यह आय वृद्धि के नए अवसर लाता है। शिक्षा के लिए भी यह समय प्रगतिशील है यानी छात्रों के यह समय अनुकूल है। जिन्होंने हाल-फिलहाल में कहीं इंटर्नशिप के लिए अप्लाई किया है, उन्हें वहां से कॉल आ सकती है। इस दौरान आपको नई सामग्री का अध्ययन करने और नए कौशल सीखने को मिलेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं में निश्चित सफलता संभव है, हालांकि यह आपके प्रयासों पर भी निर्भर करता है। आप जितनी मेहनत करेंगे, आपको उतनी ही सफलता प्राप्त होगी। निवेश करने के लिए यह उपयुक्त समय है। आप विशेष रियल एस्टेट में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि अच्छे रिटर्न मिलने की भी संभावना नजर आ रही है।

आपके लिए यह गोचर वाकई लाभकारी रहेगा। इस समयावधि में आपको अपने जीवनसाथी से भी कुछ लाभ प्राप्त हो सकते हैं। इस दौरान आपका मन शांत रहेगा और किए गए प्रयासों में सफलता का आनंद लेंगे। अच्छी बात यह होगी कि आपको अपने पेशे में भी प्रसिद्धि मिलेगी। अन्य लोग आपकी बहुमूल्य राय के लिए आपके पास आएंगे। आप भी उनकी हर संभव मदद करते नजर आएंगे। इस समय काल में आप अपने जीवन से संतुष्ट नजर आएंगे। आप इस अवधि के दौरान अपनी उपलब्धियों पर अपनी मां को गौरवान्वित करेंगे। आपकी संपर्क सूची में नए लोग जुड़ेंगे, जिन्हें आपसे मिलकर भरपूर लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर जातक के लिए प्रगतिशील काल है।

उपाय:

  • पक्षियों को दाल खिलाएं।
  • मांस और शराब के सेवन से बचें।

पंचम भाव में बुध गोचर का प्रभाव

यदि बुध जन्म के चंद्रमा से पंचम भाव में गोचर करता है, तो आप कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर सकते हैं। यह गोचर खासकर बच्चों के लिए सही साबित नहीं होगा। उनके जीवन में कई समस्याएं पैदा कर सकता है इसलिए आप उनके साथ कैसे व्यवहार करते हैं, इस बारे में बहुत सावधान रहें। इस दौरान जीवनसाथी के साथ आपकी बहस भी हो सकती है। इसलिए अपने शब्दों पर नियंत्रण रखें और फिजूल की बातें करने से बचें। आपके लिए यह समय जरा भी अच्छा साबित नहीं होने वाला है।

आपको नौकरी का नुकसान हो सकता है। व्यय में वृद्धि होगी, जिसे आपको स्वयं नियंत्रण में रखने की कोशिश करनी होगी। जातक अपने वित्त को लेकर चिंतित रहेंगे। साथ ही जहां निवेश किया होगा, वहां घाटा होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में बहुत जरूरी है कि आप ऐसे लोगों से न मिलें, जो आपको हतोत्साहित करें। किसी के साथ हो रहे वाद-विवाद को टाल दें। जो छात्र किसी प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे हैं, उन्हें उनकी मेहनत अनुसरा फल प्राप्त नहीं हो सकेगा। ऐसे में छात्रों को पढ़ाई में अधिक मेहनत और ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है।

उपाय:

  • अपने माथे पर शुभ सफेद चंदन लगाएं।
  • भागवत पुराण का पाठ करें।

छठे भाव में बुध गोचर का प्रभाव

जन्म के चंद्रमा से बुध के छठे भाव में गोचर के साथ, सभी प्रयासों में सफलता और जीत होती है। व्यापार बढ़ता है, ज्ञान बढ़ता है और आपको कई स्रोतों से लाभ मिलता है। आप पढ़ाई में प्रगति का भी निरीक्षण करेंगे। वैसे तो आपका जीवन समृद्धियों, विलासितापूर्ण उत्पादों से भरा हुआ है। आप जीवन में काफी आराम करते हैं और धन संबंधी भी आपको किसी तरह की समस्या नहीं है। इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि आपका समय अनुकूल है और आप जितना प्रयास करेंगे, उसके अनुरूप आपको आमदनी भी पर्याप्त होगी। जहां तक आपके स्वास्थ्य की बात है, तो वह भी इस ग्रह गोचर के दौरान सही रहेगा।

आप नियमित एक्सरसाइज करें और रूटीन चेकअप करवाते रहें। आपके लिए यह समय काफी अच्छा भी रहेगा, क्योंकि जातक को कई जगहों से ज्ञान अर्जित करने का मौका मिलेगा, जो उसे विद्वान बनाए। विदेश में या उच्च शिक्षा हासिल करने का लाभ भी मिल सकता है। इस दौरान आपकी कार्य-क्षमता में वृद्धि होगी। इस गोचर के दौरान उन्हें सभी भौतिक सुख और वाहन प्राप्त होंगे। इससे उसकी खुशी और बढ़ जाएगी। आपके निजी संबंध सामान्य बने रहेंगे। थोड़ी-बहुत नोंकझोंक होने की संभावना है, जिसे आप अपनी सूझबूझ के साथ संभाल सकते हैं।

उपाय:

  • आप बुध बीज मंत्र ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः का जाप करें।
  • बुध देव की पूजा करें।
  • विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें।

सप्तम भाव में बुध गोचर का प्रभाव

जब बुध जन्म के चंद्रमा से सप्तम भाव में प्रवेश करता है, तो सहकर्मी आपसे नाखुश होने लगते हैं, वरिष्ठ आपके काम में दोष निकालने लगते हैं, घर में सभी रिश्तों में अनबन होने लगती है। इन सब कारणों से आप खुद को अकेला पाएंगे और निराशा से घिर जाएंगे। इतना ही नहीं, इन दिनों आपको बात-बात में अपने करीबियों का विरोध झेलना पड़ेगा, इसमें आपके बच्चे भी शामिल होंगे। आपकी समस्याओं का यही अंत नहीं होगा। मानसिक अशांति के कारण आपका स्वास्थ्य भी काफी खराब रहने वाला है। साथ ही आपके जीवनसाथी और बच्चों के लिए स्वास्थ्य चिंता बनी रहेगी। अगर आप चाहते हैं कि सबका स्वास्थ्य सही रहे तो आपको तनाव से मुक्ति पानी होगी। हालांकि ऐसा होना मुश्किल लग रहा है।

फिर भी आप उचित इलाज करवाएं और घर के अन्य सदस्यों को भी चिकित्सक के पास जरूर ले जाएं। अच्छे स्वास्थ्य के लिए आपको अपने जीवनसाथी और बच्चों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए ताकि वे उपेक्षित महसूस न करें। अभी के लिए किसी भी यात्रा योजना से बचें। इस समयावधि में खुद को संतुष्ट और रिफ्रेश महसूस करवाने के लिए किसी अपने पुराने साथी से मुलाकात करें। उसके साथ अपने मन की सभी बात साझा करें। इसके साथ ही अपने पार्टनर और बेस्ट फ्रेंड्स के साथ कम्युनिकेशन पर अधिक जोर दें। आप दूसरों को सलाह देने या अपने जीवन में लोगों के साथ शांति बनाने के लिए शब्दों की शक्ति का उपयोग कर सकते हैं।

उपाय:

  • बुधवार के दिन उपवास रखा करें।
  • बुध ग्रह से संबंधित चीजें जैसे साबुत मूंग, पालक, हरी घास आदि का दान करें।

अष्टम भाव में बुध गोचर का प्रभाव

जब बुध जन्म के चंद्रमा से अष्टम भाव में गोचर करता है, तो आपकी सामाजिक स्थिति में वृद्धि होने लगती है। लोगों के बीच आपका मान-सम्मान बढ़ता है। इन दिनों लग्जरी जीवनशैली नहीं तो कम से कम आरामदायक जीवनशैली का आनंद जरूरत लेने में सफल होते हैं। इतना ही नहीं, आपको न सिर्फ अपने जीवनसाथी का पूरा सहयोग मिलेगा, बल्कि बच्चों का भी भरपूर प्यार मिलेगा। यदि अन्य ग्रह आपका साथ देते हैं, तो आप भी अपने परिवार में किसी नए सदस्य का स्वागत कर सकते हैं। जो लोग समय से संतान प्राप्ति की कामना कर रहे हैं, उनका यह सपना अब पूरा हो सकता है। अब आपके करियर की बात करें, तो भले बुध आपके पक्ष में है, फिर भी निर्णय सूझबूझ से लें।

हालांकि, इस दौरान आप जो भी निर्णय लेंगे, वह आपके हित में ही होगा। इस वजह से करियर के मोर्चे पर प्रगति की अधिक संभावना बन रही है। परिणामस्वरूप अच्छी आय भी अर्जित कर सकते हैं। मानसिक शांति का भी भरपूर आनंद लेंगे। साथ ही विपक्ष पर जीत हासिल करेंगे। असल में यह जातक के लिए एक उत्कृष्ट चक्र है, जिसमें कुछ वित्तीय योजना और रणनीति बनाना आपके लिए लाभदायक साबित होगा। अगर आपने अपने दिल में अब तक कोई गहरा राज छिपा रखा है, तो समय आ गया है कि आप उसे अपने करीबी के साथ साझा करें। इससे आपकी उनके साथ अंतरंगता गहरी और रिश्ते में मजबूती आएगी।

उपाय:

  • जरूरतमंद महिला को उपहार में साड़ी दें। आप चाहें तो घर की सबसे बुजूर्ग महिला को भी उपहार स्वरूप साड़ी दे सकते हैं।
  • घर से निकलते वक्त अपने माथे पर शुभ सफेद चंदन लगाएं।

नवम भाव में बुध गोचर का प्रभाव

जन्म के चंद्रमा से नौवें भाव में बुध का गोचर अपेक्षाकृत कम भाग्यशाली अवधि की शुरुआत का प्रतीक है। इस दौरान पिता के साथ आपका विवाद हो सकता है। यह बात नई या पुरानी हो सकती है। यह बात आपके निजी लव रिलेशनशिप से संबंधित भी हो सकती है। फिलहाल के लिए वह आपकी किसी बात को लेकर राजी नहीं होंगे। आपको उन्हें मनाने के लिए उचित समय का इंतजार करना होगा। अगर आप कोई नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, इस संदर्भ में पिता की राय जानना चाहते हैं, तो कुछ समय के लिए रुक जाएं। वह इस समय आपकी बात को आसानी से नहीं समझ पांएगे।

छोटी सी बातचीत बेवजह विवाद का रूप धारण कर सकती है। इस समयावधि में वित्तीय नुकसान का योग भी है, जिस वजह से आपका मानसिक बोझ बढ़ेगा। अगर आप पहले से शादीशुदा हैं, तो जीवनसाथी के साथ कुछ बातों पर आप दोनों असहमत होंगे, जो आपके रिश्ते को प्रभावित करेगी। आप अपनी हर स्थिति में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करें। इस दौरान हर छोटी से छोटी चीज को संभालने के लिए भी आपको अथक प्रयास करने हाेंगे। लेकिन इससे निराश न हों और प्रयास जारी रखें। इसके अलावा, खर्च में कटौती करने और बचत पर विचार करने के लिए यह एक अच्छी अवधि है। लंबी दूरी की यात्रा से इन दिनों बचें।

उपाय:

  • बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए इससे संबंधित चीजें जैसे साबुत मूंग, पालक, हरी घास आदि का दान करें।

दशम भाव में बुध गोचर का प्रभाव

यदि बुध जन्म के चंद्रमा से दशम भाव में गोचर करता है, तो आप आध्यात्मिकता की ओर अधिक झुकाव महसूस करेंगे। आपके लिए यह एक आनंददायक अवधि होने जा रही है। आपका जीवन संतोषजनक होगा। साथ ही आपकी आय में वृद्धि होगी। इससे स्पष्ट होता है कि आपका करियर सही दिशा की ओर रुख करेगा। अगर कोई जातक अपने करियर की शुरुआत करने जा रहा है, तो आप सोच-समझकर अपने लिए करियर क्षेत्र का चुनाव करें। उसमें सफलता की उम्मीद बहुत ज्यादा है। आप इसका भरपूर आनंद उठाएंगे। जीवनसाथी के साथ भी आपके संबंध मधुर और खुशहाल रहेंगे। आपको अपने जीवन में किसी नए व्यक्ति के साथ समय बिताने का मौका मिल सकता है।

यह मुलाकात आपके लिए लाभकारी होगी। वैसे तो स्वभाव के कारण आपका कोई शत्रु मुश्किल ही बनेगा, अगर कोई विपक्षी है, तो आप उसे सहजता से मात दे सकेंगे। इन दिनों आपकी सामाजिक स्थिति में भी काफी सुधार होगा। इससे काफी मानसिक शांति मिलेगी। आपने पिछले दिनों अपने लिए जितने गोल सेट किए थे, उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम होंगे। अगर आपका अपना व्यापार है, तो उसमें विस्तार होगा। परिवार के सदस्यों का आपका रवैया सहायक रहेगा और वे आपकी मदद के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। इस अवधि में पवित्र स्थानों की यात्रा का संकेत हैं। लंबे समय से अगर कोई मुकदमा चल रहा है, तो उसका फैसला आपके पक्ष में होने की संभावना है।

उपाय:

  • बुध गोचर को अनुकूल बनाने के लिए बुधवार के दिन व्रत रखें।

ग्यारहवें भाव में बुध गोचर का प्रभाव

जन्म के चंद्रमा से बुध का एकादश भाव में गोचर आपकी इच्छा शक्ति को बढ़ाता है। इस समय के दौरान आपको बहुत सारी भौतिक सुख-सुविधाओं का आनंद उठाने का मौका मिलेगा। आपके भाई और मित्र विशेष रूप से आपकी ताकत के स्तंभ बनेंगे। आप अपनी कौशल का विस्तार कर सकते हैं। हाल ही में आपको अपने अंदर छिपी हुई नई प्रतिभा के बारे में पता चलेगा। आप चाहें तो उसे अपने करियर क्षेत्र के तौर पर चुन सकते हैं।

योग बताते हैं कि आप बेहतरीन स्पीच दे सकते हैं, इसे अपने करियर विकल्प के तौर पर चुन सकते हैं। इन दिनों आपके आय के स्रोतों में वृद्धि हो सकती है। आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई परेशानी नहीं होगी। आपको विपरीत लिंग के दोस्त की संगति का भी भरपूर आनंद मिलेगा। इन दिनों कोई एक आपकी ओर आकर्षित हो सकता है, जिससे आपके गहरे संबंध विकसित हो सकते हैं।

उपाय:

  • बुध बीज मंत्र का जाप करें।
  • बेहतर बुध प्रभाव के लिए बुध ग्रह से जुड़ी चीजों का दान दें।

बारहवें भाव में बुध गोचर का प्रभाव

जन्म के चंद्रमा से बारहवें भाव में होने पर बुध कमजोर हो जाता है। धन और स्वास्थ्य की हानि भी हो सकती है। यह एक ऐसा समय है जब आप अपने बारे में किसी के साथ स्वतंत्र होकर बात नहीं कर सकेंगे। इस वजह से काफी बोझिल महसूस करेंगे और बार- बार अपने इतिहास के पन्ने पलटेंगे, ताकि यह जान सकें कि आपके साथ जो हो रहा है, वह क्यों हो रहा है। लेकिन जैसा कि आप जानते ही हैं कि वक्त के साथ सब चीजें बदल जाती हैं, इसलिए ज्यादा निराश नहीं होना चाहिए। शांत मन के लिए चिंतन और ध्यान करना चाहिए। भविष्य को बेहतर बनाने के लिए अतीत की जांच करना निश्चित रूप से सार्थक है, जब तक आप अपनी ऊर्जा को अपराधबोध पर बर्बाद नहीं करते हैं।

रचनात्मक प्रयास समृद्ध हो सकते हैं, विशेष रूप से वे जो भावनाओं को आकर्षित करते हैं। आप कविता, कला, अभिनय जैसे गतिविधियों में अपना हाथ आजमाएं। निश्चित रूप से आप इनमें अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे। आप इस अवधि के दौरान विदेश जा सकते हैं। लेकिन वांछित परिणाम की अपेक्षा न करें। शत्रु बाधा डालने का प्रयास कर सकते हैं। जीवनसाथी से अनबन भी हो सकती है। इन सबका आपकी मानसिक शांति पर भारी असर पड़ सकता है, इसलिए रिश्तों में शांत और एकत्रित स्वभाव बनाए रखने का प्रयास करें।

उपाय:

  • भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • बुध देव की पूजा करें।

Budh Gochar 2023: अक्सर पूछे जानें वालें प्रश्न

बुध गोचर कितने समय तक रहता है?

एक विशिष्ट बुध गोचर कई घंटों के लिए होता है। एक राशि से दूसरी राशि में जाने में कई दिन लग जाते हैं। इसलिए आपकी कुंडली पर इसका प्रभाव प्रमुख गोचरों की तुलना में अल्पकालिक कम प्रभावशाली हो सकता है।

क्या 2023 में शुक्र और बुध ग्रह एक साथ गोचर कर सकते हैं?

हाँ, यह संभव हो सकता है। ऐसा गोचर जातकों के जीवन में सकारात्मक और नकारात्मक रूप से असाधारण परिवर्तन लाएगा।

बुध ग्रह के कौन से संकेत एक साथ चलते हैं?

मेष, सिंह और धनु एक दूसरे के साथ अच्छी तरह से चलते हैं और दोस्ती के साथ-साथ प्यार में भी सबसे अच्छे साथी बनते हैं।

बुध ग्रह प्रत्येक राशि में कितने समय तक रहता है?

बुध ग्रह कुछ दिनों या लगभग एक महीने के लिए एक राशि में हो सकता है।

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